ग्वालियर। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना के तहत 70 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलना चाहिए। लेकिन ग्वालियर में सैकड़ों बुजुर्ग इस सुविधा से वंचित हैं। इसकी वजह है आधार कार्ड में डेटा मिसमैच।
कई बुजुर्गों के आधार कार्ड में नाम, जन्मतिथि या अन्य जानकारी आयुष्मान पोर्टल के डेटा से मेल नहीं खा रही। इस कारण उनके आयुष्मान कार्ड बनने की प्रक्रिया बीच में ही अटक जा रही है। बुजुर्ग अस्पतालों और सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा।
क्या है डेटा मिसमैच की समस्या
आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए आधार कार्ड का ई-केवाईसी अनिवार्य है। जब पोर्टल पर वेरिफिकेशन होता है तो आधार में दर्ज नाम और जन्मतिथि को मैच किया जाता है। कई बुजुर्गों के आधार कार्ड पुराने हैं और उनमें स्पेलिंग या जन्मतिथि में मामूली अंतर है। यही छोटी गड़बड़ी कार्ड बनने में बड़ी बाधा बन रही है।
कुछ बुजुर्गों के आधार कार्ड में उम्र अनुमानित दर्ज है। ऐसे में सिस्टम उन्हें 70 वर्ष से अधिक मानने से इनकार कर देता है। कई मामलों में नाम में हिंदी-अंग्रेजी ट्रांसलिटरेशन की दिक्कत भी सामने आ रही है।
बुजुर्गों की परेशानी बढ़ी
ग्वालियर के विभिन्न इलाकों से ऐसे दर्जनों मामले सामने आए हैं। बुजुर्गों को पहले आधार सेंटर जाकर अपना डेटा अपडेट कराना पड़ रहा है। लेकिन आधार अपडेट की प्रक्रिया भी आसान नहीं है। कई बार बायोमेट्रिक अपडेट में तकनीकी दिक्कतें आती हैं।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाना शारीरिक रूप से कठिन है। कई बुजुर्ग चलने-फिरने में असमर्थ हैं और उन्हें परिवार के सदस्यों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की स्थिति
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह समस्या केवल ग्वालियर की नहीं बल्कि पूरे मध्य प्रदेश और देशभर में है। आधार डेटा में मिसमैच एक तकनीकी समस्या है जिसका समाधान केंद्रीय स्तर पर किया जाना चाहिए।
अधिकारियों के अनुसार जिन बुजुर्गों का डेटा मैच नहीं हो रहा उन्हें पहले आधार सेंटर में जाकर अपनी जानकारी सही करानी होगी। उसके बाद ही आयुष्मान कार्ड बन सकेगा। विभाग ने शिविर लगाकर इस प्रक्रिया को आसान बनाने का आश्वासन दिया है।
योजना का उद्देश्य और जमीनी हकीकत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 70 वर्ष से अधिक उम्र के सभी नागरिकों को आयुष्मान योजना में शामिल करने की घोषणा की थी। इसके तहत चाहे व्यक्ति किसी भी आय वर्ग का हो, उसे 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलेगा। लेकिन जमीनी स्तर पर तकनीकी बाधाओं ने इस योजना की पहुंच को सीमित कर दिया है।
ग्वालियर में ही सैकड़ों आवेदन लंबित हैं। कई बुजुर्गों ने महीनों पहले आवेदन किया था, लेकिन अभी तक उनका कार्ड नहीं बना है। ऐसे में गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए उन्हें अपनी जेब से खर्च करना पड़ रहा है।
क्या है समाधान
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को बुजुर्गों के लिए एक सरलीकृत प्रक्रिया बनानी चाहिए। आधार मिसमैच के मामलों में वैकल्पिक पहचान पत्रों को भी स्वीकार किया जा सकता है। इसके अलावा घर-घर जाकर आधार अपडेट कराने की सुविधा दी जानी चाहिए।
स्थानीय प्रशासन से भी मांग की जा रही है कि वह विशेष शिविर आयोजित करे जहां बुजुर्गों का आधार अपडेट और आयुष्मान कार्ड बनाने का काम एक ही जगह हो सके। इससे बुजुर्गों को बार-बार अलग-अलग कार्यालयों में जाने से राहत मिलेगी।
फिलहाल ग्वालियर में यह मुद्दा गंभीर बना हुआ है। बुजुर्ग नागरिक सरकार से त्वरित समाधान की उम्मीद कर रहे हैं ताकि वे अपनी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ समय पर उठा सकें।