उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां खेत में नरवाई (फसल अवशेष) जलाने के दौरान लगी आग ने एक बुजुर्ग दिव्यांग किसान की जान ले ली। सूत्रो के अनुसार बताया जा रहा है कि यह घटना रविवार को नागदा-उन्हेल मार्ग पर स्थित ग्राम सोडंग में घटित हुई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, हालांकि शुरुआती तौर पर मामला संदिग्ध माना जा रहा है।

पड़ोसी के खेत की आग बनी काल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोडंग निवासी हकिमीउद्दीन ने अपने खेत में नरवाई साफ करने के उद्देश्य से आग लगाई थी। गर्मी और तेज हवा के कारण आग ने विकराल रूप ले लिया और पास के खेत तक फैल गई। वहां मौजूद 60 वर्षीय दिव्यांग किसान रामेश्वर आंजना आग की लपटों के बीच घिर गए। शारीरिक अक्षमता और मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण वे समय रहते वहां से निकल नहीं पाए और बुरी तरह झुलसने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
सूत्रो के अनुसार बताया जा रहा है कि भैरवगढ़ थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर सोमवार सुबह पोस्टमार्टम कराया है। शव खेत में जली हुई हालत में मिला है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह केवल दुर्घटना है या इसके पीछे कोई अन्य संदिग्ध कारण।
प्रतिबंध के बावजूद धधक रहे हैं खेत
प्रशासन द्वारा नरवाई जलाने पर कड़े प्रतिबंध और जुर्माने के प्रावधान के बावजूद किसान लापरवाही बरत रहे हैं। उज्जैन, इंदौर और देवास संभाग में सैटेलाइट के जरिए लगातार निगरानी की जा रही है।
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उज्जैन: पिछले 10 दिनों में 400 से अधिक मामले सामने आए हैं। सैटेलाइट रिपोर्ट के आधार पर 334 किसानों को चिन्हित कर कार्रवाई की जा रही है।
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इंदौर: अब तक 211 मामलों में कार्रवाई की गई है।
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देवास: नियमों के उल्लंघन पर 5 किसानों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।
खतरे में जमीन की सेहत और इंसानी जान
किसान अक्सर अगली फसल की तैयारी के लिए समय और मजदूरी बचाने के चक्कर में नरवाई जला देते हैं। लेकिन यह ‘शॉर्टकट’ न केवल इंसानी जान के लिए खतरा है, बल्कि मिट्टी के लिए भी विनाशकारी है।
मिट्टी को नुकसान: आग लगाने से जमीन की ऊपरी सतह के मित्र जीवाणु और केंचुए मर जाते हैं, जिससे भूमि की उर्वरक शक्ति धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है।
जुर्माने का कड़ा प्रावधान
प्रशासन ने नरवाई जलाने पर जमीन के रकबे के अनुसार जुर्माना तय किया है:
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2 एकड़ से कम: ₹2,500 तक का जुर्माना।
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2 से 6 एकड़: ₹5,000 तक का जुर्माना।
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15 एकड़ से अधिक: ₹15,000 तक का जुर्माना और कानूनी कार्रवाई (FIR)।
प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे फसल अवशेषों को जलाने के बजाय वैकल्पिक मशीनों (जैसे- हैप्पी सीडर या सुपर सीडर) का उपयोग करें, ताकि पर्यावरण और जीवन दोनों को सुरक्षित रखा जा सके।