इंदौर में बीआरटीएस (Bus Rapid Transit System) कॉरिडोर तोड़ने से जुड़े मामले में हाई कोर्ट में सुनवाई का सिलसिला जारी है। इस प्रकरण में अब अगली सुनवाई बुधवार को निर्धारित की गई है। सोमवार को हुई सुनवाई में कोर्ट की डबल बेंच के समक्ष प्रशासन और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए, जिससे मामले की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
आज हुई सुनवाई के दौरान कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल और लोक निर्माण विभाग (PWD) के चीफ इंजीनियर अदालत में मौजूद रहे। कोर्ट ने बीआरटीएस को तोड़ने के निर्णय, उसके औचित्य और भविष्य की यातायात व्यवस्था को लेकर अधिकारियों से विस्तृत जानकारी मांगी। न्यायालय यह जानना चाहता है कि इस फैसले के पीछे प्रशासन की क्या योजना है और इससे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा।
अदालत में प्रशासन की ओर से यह बताया गया कि बीआरटीएस को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों, ट्रैफिक जाम और सड़क सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि बीआरटीएस हटाने के बाद शहर में वैकल्पिक ट्रैफिक प्लान और सड़क चौड़ीकरण जैसे उपायों पर काम किया जा रहा है, ताकि आम जनता को किसी तरह की परेशानी न हो।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात पर भी जोर दिया कि किसी भी सार्वजनिक परियोजना को हटाने या बदलने से पहले उसके तकनीकी, पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का गहराई से मूल्यांकन जरूरी है। न्यायालय ने संकेत दिए कि अगली सुनवाई में इन सभी बिंदुओं पर और विस्तृत चर्चा की जाएगी और प्रशासन से ठोस रिपोर्ट पेश करने को कहा जा सकता है।
अब इस पूरे मामले में सभी की नजरें बुधवार की सुनवाई पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि अगली तारीख पर कोर्ट प्रशासन से स्पष्ट रोडमैप और ठोस दस्तावेजों की मांग कर सकता है। बीआरटीएस को लेकर लंबे समय से चल रही बहस के बीच यह मामला शहर के यातायात भविष्य के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।