‘वंदे मातरम्’ के अपमान पर हाईकोर्ट का सख्त रुख: पार्षद रुबीना खान और फौजिया शेख को कारण बताओ नोटिस जारी

इंदौर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के प्रति अनुशासनहीनता और गरिमा के उल्लंघन के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने इंदौर नगर निगम की दो पार्षदों, रुबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर जवाब तलब किया है।
क्या है पूरा मामला?
यह कानूनी कार्रवाई इंदौर नगर निगम की एक हालिया घटना के बाद शुरू हुई, जहां राष्ट्रीय गीत के गायन के दौरान हुए विवाद और कथित अपमानजनक आचरण ने प्रदेशभर में आक्रोश पैदा कर दिया था। एडवोकेट योगेश हेमनानी द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) में आरोप लगाया गया कि सार्वजनिक और सरकारी मंचों पर राष्ट्रीय गीत की गरिमा को बनाए रखने के लिए वर्तमान में कोई स्पष्ट कानूनी ढांचा या नियम उपलब्ध नहीं हैं।
याचिका की प्रमुख मांगें:
  • नियामक ढांचा: याचिकाकर्ता ने दलील दी कि शासकीय संस्थानों में ‘वंदे मातरम्’ के उच्चारण के समय आचरण और अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए सरकार को प्रभावी दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए।
  • संवैधानिक कर्तव्य: याचिका में संविधान के अनुच्छेद 51A (a) का हवाला दिया गया, जिसके तहत राष्ट्र के आदर्शों, प्रतीकों और राष्ट्रीय गीत का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक कर्तव्य है।
  • जवाबदेही: सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों का आचरण समाज के लिए एक उदाहरण होना चाहिए, इसलिए उनके द्वारा किया गया उल्लंघन अधिक गंभीर है।
शासन से भी मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए न केवल संबंधित पार्षदों, बल्कि प्रमुख सचिव और गृह सचिव सहित अन्य सरकारी विभागों को भी नोटिस जारी किया है। अदालत यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भविष्य में किसी भी सरकारी कार्यक्रम में राष्ट्रीय गीत के समय अनुशासन बना रहे।
यह मामला अब कोर्ट के विचाराधीन है। इस याचिका का उद्देश्य एक ऐसा कानूनी प्रोटोकॉल तैयार करवाना है, जिससे राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान की घटनाओं पर लगाम लगाई जा सके। अब देखना यह है कि राज्य शासन इस संबंध में क्या स्पष्टीकरण देता है और हाईकोर्ट राष्ट्रीय गीत के सम्मान को लेकर क्या नए दिशा-निर्देश तय करता है।