इंदौर। शहर के मास्टर प्लान को लेकर खड़े हुए बड़े कानूनी और प्रशासनिक संकट पर आखिरकार हाईकोर्ट की डबल बेंच ने फिलहाल ब्रेक लगा दिया है। नगरीय प्रशासन विभाग और नगर तथा ग्राम निवेश द्वारा दायर अपील को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने सिंगल बेंच के उस आदेश पर स्टे दे दिया, जिसमें कहा गया था कि इंदौर का मास्टर प्लान 31 मार्च 2021 को ही समाप्त हो चुका है।
न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की डबल बेंच ने बुधवार 13 मई को सुनवाई करते हुए शासन, नगर निगम और इंदौर विकास प्राधिकरण को बड़ी राहत प्रदान की। साथ ही मूल याचिकाकर्ता राज बिसानी सहित अन्य पक्षों को भी अपने तर्क रखने का अवसर दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई अब 29 जून 2026 को होगी। तब तक सिंगल बेंच के फैसले पर रोक जारी रहेगी।
कैसे खड़ा हुआ था संकट?
5 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने लसूडियामोरी स्थित एक जमीन के व्यावसायिक उपयोग की अनुमति से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए 17 पन्नों का अहम फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा था कि 1 जनवरी 2008 से लागू इंदौर का मास्टर प्लान 31 मार्च 2021 के बाद प्रभावहीन हो गया। साथ ही संबंधित जमीन पर 60 दिनों में व्यावसायिक अनुमति देने के निर्देश भी जारी किए गए थे।
यह फैसला आते ही शहर में कानूनी और प्रशासनिक भूचाल जैसी स्थिति बन गई। मास्टर प्लान की सड़कों की चौड़ाई, नगर निगम की कार्रवाई, विकास प्राधिकरण की टीपीएस योजनाएं और पिछले पांच वर्षों में नगर तथा ग्राम निवेश द्वारा स्वीकृत अनेक अभिन्यासों की वैधता पर सवाल उठने लगे।
सड़क चौड़ीकरण पर भी लगी थी रोक
सिंगल बेंच के आदेश का हवाला देते हुए छावनी, चंदन नगर सहित कई क्षेत्रों के रहवासी और व्यापारी हाईकोर्ट पहुंच गए। उनका तर्क था कि जब मास्टर प्लान ही अस्तित्व में नहीं है तो नगर निगम किस आधार पर सड़क चौड़ीकरण कर रहा है। छावनी रोड मामले में तो तोड़फोड़ और कार्रवाई पर स्टे भी मिल गया था। इससे निगम की कई परियोजनाएं अटकने लगी थीं। इतना ही नहीं, 468 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली 23 सड़कों की चौड़ाई को लेकर भी विवाद गहरा गया था। आरोप लगे कि टेंडर मंजूर होने के बाद जनप्रतिनिधियों के दबाव में सड़क चौड़ाई घटाई गई, जबकि शासन ने स्पष्ट कहा कि ऐसा करने का अधिकार न निगम को है और न ही स्थानीय स्तर पर किसी अन्य एजेंसी को।
डबल बेंच ने क्यों माना मामला गंभीर?
विशेषज्ञों का भी मानना था कि जब तक नया मास्टर प्लान लागू नहीं होता, तब तक पुराना प्लान प्रभावी माना जाता है। यदि सिंगल बेंच का आदेश लागू रहता, तो 31 मार्च 2021 के बाद नगर तथा ग्राम निवेश द्वारा स्वीकृत कॉलोनियों, अभिन्यासों और विकास योजनाओं को भी चुनौती दी जा सकती थी। इसी आशंका को देखते हुए शासन हरकत में आया और नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के साथ नगर तथा ग्राम निवेश संचालक ने ताबड़तोड़ अपील दायर की। डबल बेंच ने मामले की गंभीरता को समझते हुए सिंगल बेंच के आदेश पर तत्काल रोक लगा दी।
फिलहाल मिली बड़ी राहत
हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश से फिलहाल शासन, नगर निगम और विकास प्राधिकरण को राहत मिल गई है। साथ ही शहर में चल रहे सड़क चौड़ीकरण, फ्लायओवर और विकास योजनाओं पर मंडरा रहा अनिश्चितता का संकट भी कुछ समय के लिए टल गया है। अब सबकी नजर 29 जून 2026 की अगली सुनवाई पर टिक गई है, जहां यह तय होगा कि इंदौर का मास्टर प्लान कानूनी रूप से जारी माना जाएगा या फिर सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखा जाएगा।