महाकाल की नगरी में ‘हाईटेक’ महाशिवरात्रि: 10 लाख श्रद्धालुओं के लिए गूगल मैप से होगा क्राउड मैनेजमेंट, 40 मिनट में होंगे दर्शन

Ujjain News: अवंतिका नगरी उज्जैन इस वर्ष महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर एक अभूतपूर्व अनुभव की साक्षी बनने जा रही है। 15 फरवरी को आने वाली महाशिवरात्रि के लिए उज्जैन पुलिस और प्रशासन ने ‘जीरो टॉलरेंस’ ट्रैफिक जाम और ‘त्वरित दर्शन’ की नीति अपनाई है।

इस बार का मैनेजमेंट केवल लाठियों और बैरिकेड्स के भरोसे नहीं, बल्कि गूगल मैप के एल्गोरिदम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तालमेल पर टिका है। प्रशासन का लक्ष्य है कि देशभर से आने वाले करीब 10 लाख श्रद्धालुओं को मात्र 40 मिनट के भीतर बाबा महाकाल के दर्शन सुलभ हो सकें।

गूगल मैप का ‘मास्टर स्ट्रोक’: पुलिस ही तय करेगी आपका रास्ता

इस बार उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं को उनके मोबाइल पर गूगल मैप वही रास्ता दिखाएगा, जिसे पुलिस सुरक्षित और खाली मानेगी। इसके लिए उज्जैन पुलिस ने गुरुग्राम की एक नामचीन आईटी कंपनी और अपनी साइबर टीम के साथ मिलकर 10 विशेषज्ञों की एक ‘कंट्रोल यूनिट’ तैयार की है।

एडिशनल एसपी राहुल देशमुख के अनुसार, यह टीम 14 फरवरी की रात से ही सक्रिय हो जाएगी। इसकी कार्यप्रणाली कुछ इस तरह होगी:

  • रियल-टाइम रूट मैनिपुलेशन: जैसे ही किसी मार्ग पर दबाव बढ़ेगा या कोई पार्किंग फुल होगी, आईटी टीम गूगल मैप के बैकएंड एल्गोरिदम में बदलाव कर उस रास्ते को मैप से हटा देगी।

  • वैकल्पिक मार्ग सक्रियता: यात्रियों को मैप पर केवल वही वैकल्पिक मार्ग और पार्किंग स्थल दिखाई देंगे, जहाँ जगह खाली होगी। इससे शहर के भीतर जाम की स्थिति पैदा ही नहीं होगी।

  • डिजिटल बैरिकेडिंग: यह तकनीक बाहरी श्रद्धालुओं को भ्रमित होने से बचाएगी और उन्हें सीधे निर्धारित पार्किंग स्थलों तक गाइड करेगी।

दर्शन व्यवस्था: कर्कराज से महाकाल तक अभेद्य घेरा

उज्जैन एसपी प्रदीप शर्मा ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोपरि है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कर्कराज पार्किंग के पास से विशेष बैरिकेडिंग की गई है।

श्रद्धालुओं को शटल बसों के माध्यम से पार्किंग से मंदिर के मुख्य द्वार के करीब छोड़ा जाएगा, जहाँ से वे कतारबद्ध होकर सुगम दर्शन कर सकेंगे। प्रशासन का दावा है कि कतार में लगने के बाद अधिकतम 40 मिनट में श्रद्धालु गर्भगृह की छटा निहार सकेंगे।

सुरक्षा के मोर्चे पर भी प्रशासन मुस्तैद है:

  1. पुलिस बल: 1500 से अधिक सशस्त्र पुलिसकर्मी और अधिकारी तैनात रहेंगे।

  2. तीसरी आँख: 200 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों और हाई-रिजोल्यूशन ड्रोन्स के जरिए पूरे मेला क्षेत्र की मॉनिटरिंग की जाएगी।

  3. साइन बोर्ड: बाहरी यात्रियों के लिए सभी प्रमुख मार्गों पर बड़े और स्पष्ट संकेतक (Signages) लगाए गए हैं।

रूट और पार्किंग प्लान: कहाँ खड़ी करें अपनी गाड़ी?

प्रशासन ने विभिन्न शहरों से आने वाले वाहनों के लिए अलग-अलग रूट और 10 प्रमुख पार्किंग स्थल निर्धारित किए हैं:

रूट (आगमन)

निर्धारित पार्किंग स्थल

वाहन का प्रकार

इंदौर रोड

प्रशांति धाम, इंजीनियरिंग कॉलेज, शनि मंदिर

चार पहिया

मक्सी/देवास रोड

मन्नत गार्डन, इंपीरियल गार्डन, इंजीनियरिंग कॉलेज

दो पहिया व चार पहिया

बड़नगर/नागदा

मुरलीपुरा (कृषि उपार्जन केंद्र), राठौर समाज मैदान

चार पहिया

आगर रोड

कार्तिक मेला ग्राउंड, गुरुद्वारा भूमि

सभी वाहन

VIP मार्ग

हरिफाटक ब्रिज के नीचे

केवल पास वाले वाहन

विशेष व्यवस्था: यदि मन्नत या इंपीरियल गार्डन की पार्किंग भर जाती है, तो इंदौर और भोपाल से आने वाले वाहनों को रिजर्व पार्किंग में भेजा जाएगा, जहाँ से ‘लोक सेवा’ वाहनों (शटल बस) द्वारा श्रद्धालुओं को कर्कराज पार्किंग तक पहुँचाया जाएगा।

इन रास्तों पर रहेगा ‘नो एंट्री’ का बोर्ड

14 फरवरी की शाम 4 बजे से ही शहर के कुछ प्रमुख आंतरिक मार्ग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वे इन मार्गों पर वाहन ले जाने का प्रयास न करें:

  • हरिफाटक टी से महाकाल घाटी और इंटरप्रिटेशन मार्ग।

  • शंकराचार्य चौराहा से नृसिंह घाट और दानीगेट की ओर।

  • जंतर-मंतर से जयसिंहपुरा और चारधाम पार्किंग।

  • दौतलगंज से लोहा पुल और कंठाल चौराहा से छत्री चौक।

  • केडी गेट से टंकी चौराहा।

दो पहिया वाहनों के लिए विशेष कॉरिडोर

इंदौर और देवास की ओर से आने वाले दो पहिया वाहनों के लिए एक विशेष कॉरिडोर बनाया गया है। ये वाहन जंतर-मंतर → लालपुल टर्निंग होते हुए सीधे कर्कराज पार्किंग पहुँच सकेंगे। वहीं, बड़नगर की ओर से आने वाले दो पहिया वाहन क्षत्रिय तेली समाज मैदान और गुरुद्वारा परिसर में पार्क किए जाएंगे।

निष्कर्ष

उज्जैन प्रशासन का यह ‘हाईटेक’ प्रयोग न केवल भीड़ को नियंत्रित करने का एक मॉडल बनेगा, बल्कि धार्मिक पर्यटन में तकनीक के इस्तेमाल की नई मिसाल भी पेश करेगा। बाबा महाकाल के भक्तों के लिए यह सुनिश्चित किया गया है कि उनकी आस्था की डगर में ट्रैफिक का रोड़ा न आए।