वर्ष 2026 में होली का त्योहार 15 मार्च को मनाया जाएगा। यह हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि पर यह पर्व मनाया जाता है।
होलिका दहन 14 मार्च 2026 को शाम के समय होगा। धुलेंडी यानी रंगों का त्योहार अगले दिन 15 मार्च को खेला जाएगा। देशभर में लोग इस पर्व को बड़े उत्साह से मनाते हैं।
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार होलिका दहन के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व है। भद्रा काल में होलिका दहन नहीं किया जाता है। प्रदोष काल में पूर्णिमा तिथि के दौरान दहन करना शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलिका दहन के समय विशेष पूजा विधि का पालन किया जाता है। इस दिन गोबर से होलिका और प्रह्लाद की प्रतिमा बनाई जाती है।
पूजा विधि और परंपरा
होलिका दहन से पहले पूजा की जाती है। जल, रोली, चावल, फूल और कच्चा सूत लेकर होलिका की परिक्रमा की जाती है। परिक्रमा के दौरान जल चढ़ाया जाता है।
पूजा में गेहूं की बालियां, चना और मूंग भी चढ़ाए जाते हैं। होलिका दहन के बाद इन्हें प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
होली का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप की कथा से यह पर्व जुड़ा है। होलिका दहन इसी कथा की याद दिलाता है।
इस दिन लोग पुरानी बुराइयों को भूलकर नई शुरुआत करते हैं। रंगों का त्योहार सामाजिक सद्भाव और एकता का संदेश देता है। सभी वर्ग के लोग मिलकर यह पर्व मनाते हैं।
धुलेंडी के दिन रंग और गुलाल से खेलने की परंपरा है। लोग एक दूसरे को रंग लगाते हैं और मिठाइयां बांटते हैं। घरों में विशेष पकवान बनाए जाते हैं।
तैयारियां और सावधानियां
होली से कुछ दिन पहले से ही तैयारियां शुरू हो जाती हैं। बाजारों में रंग और गुलाल की दुकानें सजने लगती हैं। परिवार और दोस्तों के साथ मिलन का यह विशेष अवसर होता है।
त्योहार के दौरान प्राकृतिक रंगों का उपयोग करना चाहिए। रासायनिक रंगों से त्वचा को नुकसान हो सकता है। पानी की बर्बादी से भी बचना चाहिए।
होली 2026 की तिथियां अभी से नोट कर लेनी चाहिए। धार्मिक विधि विधान के साथ यह पर्व मनाना शुभ फलदायी माना जाता है।