IBM के CEO ने दी चेतावनी:कॉल सेंटर में काम करने वाले हो जाएं सावधान

New Delhi: टेक्नोलॉजी की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर जितनी संभावनाएं हैं, उतनी ही चिंताएं नौकरियों को लेकर भी हैं। इसी बहस के बीच IBM के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) अरविंद कृष्णा ने एक बड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि AI के बढ़ते प्रभाव से कॉल सेंटर जैसी बैक-ऑफिस नौकरियों पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है और ये नौकरियां खत्म हो सकती हैं।

ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में कृष्णा ने साफ किया कि AI कुछ नौकरियां खत्म करेगा तो कई नए अवसर भी पैदा करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब कंपनियों की यह जिम्मेदारी है कि वे अपने कर्मचारियों को भविष्य के लिए तैयार करें और उन्हें रीस्किल करें, ताकि वे नई टेक्नोलॉजी के साथ काम कर सकें।

टेक सेक्टर में छंटनी का दौर जारी

अरविंद कृष्णा की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब पूरी दुनिया में टेक्नोलॉजी कंपनियां बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी कर रही हैं। कंपनियां अपने ऑपरेशंस को फिर से व्यवस्थित करने और AI जैसी नई तकनीकों को अपनाने के लिए लागत में कटौती कर रही हैं।

हाल ही में, फिटनेस टेक्नोलॉजी कंपनी Peloton Interactive Inc. ने लागत घटाने का हवाला देते हुए अपने लगभग 11 प्रतिशत कर्मचारियों को निकालने का फैसला किया है। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट और एंटरप्राइज-बेस्ड पहलों पर काम करने वाले इंजीनियरों पर पड़ने की संभावना है। इसी तरह, पहले Amazon जैसी बड़ी कंपनियां भी हजारों कर्मचारियों की छंटनी का ऐलान कर चुकी हैं।

‘50% एंट्री-लेवल नौकरियां खत्म हो जाएंगी’

नौकरियों पर AI के असर को लेकर चिंता जताने वाले अरविंद कृष्णा अकेले नहीं हैं। AI सेफ्टी और रिसर्च कंपनी एंथ्रोपिक के CEO डारियो अमोदेई ने तो और भी गंभीर भविष्यवाणी की है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि अगले 1 से 5 साल के भीतर एंट्री-लेवल व्हाइट-कॉलर नौकरियों में 50 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।

“AI 1-5 सालों में 50 परसेंट एंट्री-लेवल व्हाइट-कॉलर नौकरियों को खत्म कर देगा, साथ ही हमें लगता है कि हमारे पास सिर्फ 1-2 सालों में ऐसा AI हो सकता है जो हर किसी से ज़्यादा काबिल हो।” — डारियो अमोदेई, CEO, एंथ्रोपिक

अमोदेई की इस चिंता को अमेरिकी श्रम बाजार के आंकड़े भी बल देते हैं। ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स के अनुसार, अमेरिका में दिसंबर के अंत में नौकरियों के अवसर घटकर 65.4 लाख रह गए, जो सितंबर 2020 के बाद का सबसे निचला स्तर है। यह आंकड़ा जॉब मार्केट में आ रही सुस्ती का संकेत है, जिसे AI के बढ़ते दखल से जोड़कर देखा जा रहा है।