Indore News : इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) ने अपनी विभिन्न योजनाओं में आवंटित भूखंडों पर वर्षों से निर्माण नहीं करने वाले आवंटियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। शासन के व्ययन नियमों के तहत, 10 साल की अवधि में निर्माण कार्य पूरा न करने पर अब प्राधिकरण लीज निरस्त करेगा। इस संबंध में सैकड़ों आवंटियों को नोटिस जारी किए गए हैं, जिससे हड़कंप मचा हुआ है।
प्राधिकरण के नियमों के अनुसार, किसी भी आवंटी को लीज पर संपत्ति मिलने के 5 साल के भीतर न्यूनतम 10% निर्माण शुरू करना अनिवार्य है। यदि ऐसा नहीं होता है, तो 100 रुपये प्रति वर्ग मीटर प्रति वर्ष की दर से कम्पाउंडिंग शुल्क लगाया जा सकता है। वहीं, 10 साल की अवधि पूरी होने तक भी निर्माण न होने की स्थिति में, नियम 22 के तहत प्राधिकरण को लीज निरस्त कर संपत्ति पर पुनः कब्जा लेने का अधिकार है।
यह नियम उन लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है, जिन्होंने सेकंड हैंड या रीसेल में प्लॉट खरीदे हैं। अक्सर ऐसे खरीदारों को इस शर्त की जानकारी नहीं होती और जब वे नामांतरण या लीज नवीनीकरण के लिए प्राधिकरण पहुंचते हैं, तब उन्हें इस नियम का पता चलता है। इसके चलते प्राधिकरण में कई मामले अटके हुए हैं।
शासन से मांगा गया मार्गदर्शन
इस मामले में एक बड़ी उलझन यह है कि अगर कोई आवंटी 10 साल की समय सीमा बीतने के बाद निर्माण करना चाहता है तो उस पर कितना कम्पाउंडिंग शुल्क लगाया जाए। इसे लेकर नियमों में स्पष्टता नहीं है। प्राधिकरण के सीईओ की ओर से शासन को पत्र भेजकर इस पर मार्गदर्शन मांगा गया है। हालांकि, पहले भी भेजे गए ऐसे ही एक पत्र पर कोई जवाब नहीं मिला था, जिससे असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
कब्जा लेना नहीं है आसान
हालाकि, प्राधिकरण के लिए लीज निरस्त करने के बाद कब्जा वापस लेना एक बड़ी चुनौती रही है। होटल सायाजी समेत कई पुराने मामलों में प्राधिकरण ने लीज तो निरस्त कर दी, लेकिन संपत्ति पर कब्जा आज तक हासिल नहीं कर पाया। ऐसे मामले सालों तक अदालतों में चलते रहते हैं। पहले बोर्ड संकल्पों के आधार पर कम्पाउंडिंग राशि लेकर राहत देता रहा है, लेकिन अब शासन के नियमों का कड़ाई से पालन करने का फैसला किया गया है।
अधिकारियों की कमी और नई नियुक्ति
एक तरफ जहां प्राधिकरण नियमों को लेकर सख्ती बरत रहा है, वहीं दूसरी ओर वह अधिकारियों और कर्मचारियों की भारी कमी से भी जूझ रहा है। संपदा शाखा में ही करीब आधा दर्जन सहायक संपदा अधिकारियों की जरूरत है। इस कमी को दूर करने के लिए शासन ने इंदौर में पदस्थ नायब तहसीलदार शिवशंकर जारोलिया को प्रतिनियुक्ति पर प्राधिकरण में सहायक संपदा अधिकारी नियुक्त किया है। नगरीय विकास और आवास विभाग ने यह आदेश जारी किया है।