Indore News: भारतीय प्रबंध संस्थान इंदौर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस “युथ फॉर इम्पैक्ट: सोशल इनोवेशन एंड इन्क्लूसिव लीडरशिप – एम्पावरिंग यूथ, ट्रांसफॉर्मिंग फ्यूचर्स” का औपचारिक समापन हो गया।
आयोजन आईआईएम इंदौर ने युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के युवा कार्य विभाग के समन्वय से किया। दूसरे दिन का फोकस युवा उद्यमिता, समावेशी नवाचार और उत्तरदायी नेतृत्व पर रहा। दिन भर मुख्य व्याख्यान, पैनल चर्चा, शोध पत्र प्रस्तुतियां और पोस्टर सत्र आयोजित किए गए।
कांफ्रेंस आयोजक प्रो. शिवानी शर्मा ने स्वागत संबोधन में कहा कि युवाओं की उद्यमशील क्षमता को मजबूत करने के लिए सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र जरूरी है। उन्होंने शैक्षणिक अधिगम को वास्तविक जीवन के प्रभाव से जोड़ने पर जोर दिया। उनके अनुसार, नीति, संस्थान और उद्योग के बीच सहयोग से युवा-नेतृत्वित समाधान तेजी से आगे बढ़ सकते हैं।
वैश्विक उद्यमिता और जिम्मेदार मूल्य शृंखलाओं पर चर्चा
दूसरे दिन का पहला मुख्य व्याख्यान पोलितेक्निको दी मिलानो, इटली के प्रो. एंड्रिया सियानेसी ने दिया। उनका विषय “एंटरप्रेन्योरशिप इन द फैशन इंडस्ट्री” था। उन्होंने कहा कि वैश्विक फैशन पारिस्थितिकी तंत्र तेजी से बदल रहा है और इसमें सततता, नवाचार और उत्तरदायी मूल्य शृंखलाओं का महत्व बढ़ा है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सामाजिक नवाचार में युवा उद्यमियों की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।
“युवा उद्यमियों के जीवनानुभव उन्हें अधिक प्रामाणिक और उद्देश्यपूर्ण समस्या-समाधान की दृष्टि देते हैं।” — प्रो. एंड्रिया सियानेसी
प्रो. सियानेसी ने सतत विकास लक्ष्यों के साथ युवा उद्यमियों की प्रतिबद्धता को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, मापनीय प्रभाव संकेतकों पर स्पष्ट ध्यान रखने से उद्यमों का विस्तार तेज होता है। इससे व्यापक पहुंच वाले और अधिक समावेशी कारोबारी मॉडल बनाना संभव होता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिंघम, दुबई के प्रो. सनीश एडाचेरियन ने “क्रॉस-नेशनल एंटरप्रेन्योरशिप, इन्क्लूसिव इनोवेशन” विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने न्यायसंगत उद्यमशील पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, समावेशी बिजनेस मॉडल और संस्थागत समर्थन को जरूरी बताया। उन्होंने संकेत दिया कि सीमा-पार सहयोग से स्थानीय समस्याओं के लिए बेहतर और स्केलेबल समाधान विकसित किए जा सकते हैं।
यंग सोशल एंटरप्रेन्योरशिप: अनुभव, चुनौतियां और रास्ते
“यंग सोशल एंटरप्रेन्योरशिप” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा को सम्मेलन का अहम सत्र माना गया। इसमें यूनिपैड्स की संस्थापक गीता सोलंकी, नोवॉर्बिस इटस प्राइवेट लिमिटेड के हर्ष नीखरा और सरप्राइज़ समवन की संस्थापक पिंकी माहेश्वरी शामिल हुए। सत्र का संचालन आईआईएम इंदौर के प्रो. पुण्यश्लोक द्विबेदी ने किया।
पैनलिस्टों ने उद्देश्य-आधारित उद्यम खड़े करने के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने शुरुआती फंडिंग, टीम निर्माण, बाजार की स्वीकार्यता और लगातार काम करते रहने की चुनौती पर बात की।
चर्चा में यह बात सामने आई कि सामाजिक उद्यमों को केवल वित्तीय समर्थन नहीं, बल्कि भरोसेमंद मेंटरशिप, नेटवर्क और नीतिगत सहूलियतें भी चाहिए। पैनल ने इस बात पर सहमति जताई कि युवा-नेतृत्वित सामाजिक उद्यम जमीनी समस्याओं पर काम करते हुए नवाचारी और सतत मॉडल दे रहे हैं।
“परिपक्व नागरिकता निरंतर उत्तरदायित्व की भावना पर आधारित होती है, जहां व्यक्ति औपचारिक भूमिकाओं से आगे समाज के प्रति जवाबदेह रहता है।” — प्रो. रामाधर सिंह