इंदौर: हाईकोर्ट ने लगाई कड़ी फटकार, प्रदूषण फैलाने वाली 243 फैक्ट्रियों की कटेगी बिजली 

Indore News : देश भर में अपनी सफाई के लिए मशहूर इंदौर शहर के दामन पर प्रदूषण के दाग गहरे होते जा रहे हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण में नंबर वन रहने वाले इस शहर में हवा और पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंताजनक स्थिति बनी हुई है।
इसी विरोधाभास पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) हरकत में आ गया है और अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम देने की तैयारी कर ली है।
प्रदूषण बोर्ड ने इंदौर जिले में संचालित 243 उद्योगों को चिन्हित कर उन्हें नोटिस जारी कर दिया है। ये वे कारखाने हैं जो या तो बिना वैध लाइसेंस के चल रहे थे या फिर प्रदूषण नियंत्रण के निर्धारित मापदंडों की धज्जियां उड़ा रहे थे। बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल कागजी कार्रवाई या जुर्माना नहीं होगा, बल्कि इन इकाइयों की बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप कर दी जाएगी।
बिजली कंपनी को सौंपी गई डिफॉल्टरों की सूची
प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई तेज करते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बिजली वितरण कंपनी के साथ समन्वय स्थापित किया है। बोर्ड के इंदौर रीजनल ऑफिसर सतीश चौकसे ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि नियमों को ताक पर रखने वाले उद्योगों की सूची तैयार कर ली गई है।

“हमने 243 उद्योगों को नोटिस जारी किए हैं। इनमें से कई उद्योग बिना अनुमति के संचालित हो रहे हैं। ऐसे सभी उद्योगों की सूची बिजली कंपनी को सौंप दी गई है ताकि सीधे तौर पर इनकी बिजली काटी जा सके और संचालन बंद कराया जा सके।” — सतीश चौकसे, रीजनल ऑफिसर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

अधिकारियों के मुताबिक, बिजली कनेक्शन कटने से इन फैक्ट्रियों का उत्पादन तत्काल प्रभाव से रुक जाएगा, जो प्रदूषण रोकने के लिए एक प्रभावी कदम साबित होगा।
हजारों उद्योग बिना अनुमति संचालित
हाईकोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट ने इंदौर के औद्योगिक ढांचे की पोल खोलकर रख दी है। आंकड़ों के मुताबिक, इंदौर जिले में कुल 5961 उद्योग पंजीकृत हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से 1000 से अधिक उद्योग प्रदूषण विभाग की अनुमति के बिना ही धड़ल्ले से चल रहे थे। प्रशासन की नाक के नीचे ये इकाइयां सालों से पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही थीं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया था।
जांच में पाया गया है कि जिले में खनन गतिविधियां, स्टोन क्रशर और ‘रेड-ऑरेंज’ श्रेणी के उद्योग प्रदूषण के सबसे बड़े स्रोत बनकर उभरे हैं। इन उद्योगों से निकलने वाले धुएं और रसायनों ने न केवल शहर की आबोहवा बिगाड़ी है, बल्कि भूजल को भी दूषित किया है।
9 फरवरी को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने माना है कि इंदौर में वर्तमान हालात जल प्रदूषण निवारण और वायु प्रदूषण निवारण अधिनियमों का खुला उल्लंघन हैं। कोर्ट ने इसे नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बताया है। इस मामले में अगली सुनवाई 9 फरवरी को निर्धारित की गई है।
आगामी सुनवाई में महाधिवक्ता को प्रदूषण बोर्ड की ओर से की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करनी होगी। विधि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बोर्ड का जवाब और कार्रवाई संतोषजनक नहीं पाई गई, तो न्यायालय अधिकारियों के खिलाफ और भी कड़े निर्देश जारी कर सकता है। फिलहाल, बिजली काटने के आदेश से औद्योगिक क्षेत्रों में हड़कंप मचा हुआ है।