Indore/Bhopal: पश्चिम एशिया में गहराते ईरान-इजराइल युद्ध के बादलों ने मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था और जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने के कारण पिछले दो दिनों से प्रदेश में कमर्शियल एलपीजी (नीले सिलेंडर) की सप्लाई ठप पड़ी है।
इस संकट ने न केवल होटल और रेस्टॉरेंट इंडस्ट्री को हिला दिया है, बल्कि शादियों के सीजन में कैटरर्स और सराफा कारीगरों के सामने भी ‘इमरजेंसी’ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं।
इंदौर प्रशासन की अजीब सलाह: ‘पारंपरिक ईंधन अपनाएं’
इंदौर में कमर्शियल सिलेंडर की भारी किल्लत के बीच खाद्य विभाग के एक सुझाव ने नई बहस छेड़ दी है। इंदौर फूड कंट्रोलर एमएल मारू ने मंगलवार को कैटरिंग संगठनों के साथ बैठक की। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय समस्याओं के चलते फिलहाल गैस आपूर्ति रुकी हुई है। विकल्प के तौर पर उन्होंने कैटरर्स को लकड़ी, कंडा और पारंपरिक भट्ठियों का उपयोग करने की सलाह दी है।
हालाकि, कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि यह व्यावहारिक नहीं है। भंडारी रिजॉर्ट के जीएम मुकेश लाड के मुताबिक, “आज के दौर के महाराज और हलवाई लकड़ी पर खाना बनाने के अभ्यस्त नहीं हैं, और केरोसिन भी आसानी से उपलब्ध नहीं है।”
शादियों के मेन्यू पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
राजधानी भोपाल में अगले 20 दिनों में 1,000 से ज्यादा शादियां होनी हैं। गैस की कमी को देखते हुए इंदौर के कैटरिंग संगठनों ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब शादियों में परोसे जाने वाले 100 तरह के पकवानों की जगह केवल 15 मुख्य पकवान ही तैयार किए जाएंगे। इसका उद्देश्य ईंधन की खपत कम करना और उपलब्ध संसाधनों में काम चलाना है।
सराफा और रेहड़ी पटरी पर संकट
गैस संकट का असर केवल खाने-पीने तक सीमित नहीं है। भोपाल सराफा एसोसिएशन के मुताबिक:
शहर में करीब 3,000 कारीगर गहने बनाने का काम करते हैं।
औसतन एक कारीगर को महीने में 3 सिलेंडर की जरूरत होती है।
पूरे सराफा बाजार को रोजाना 300 सिलेंडरों की आवश्यकता है, जो फिलहाल पूरी नहीं हो पा रही है।
इसके अलावा, सड़क किनारे ठेला लगाने वाले छोटे व्यापारियों के सामने भी रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
किसे मिलेगी प्राथमिकता?
मध्य प्रदेश कैटरिंग संगठन के अध्यक्ष उमेश जैन के मुताबिक प्रशासन ने वितरण की एक प्राथमिकता सूची (Priority List) तैयार की है। जब भी सप्लाई बहाल होगी, सिलेंडर सबसे पहले:
अस्पताल (Hospitals)
हॉस्टल (Hostels)
कैटरिंग और अन्य संस्थान को दिए जाएंगे।
राहत की खबर: मुरैना में पहुंची पहली खेप
जहाँ इंदौर और उज्जैन में पैनिक बुकिंग और लंबी कतारें दिख रही हैं, वहीं मुरैना से राहत भरी खबर आई है। इंडियन ऑयल (रोशन गैस) के गोदाम पर सिलेंडरों से भरी एक गाड़ी पहुंच गई है, जिससे उम्मीद बंधी है कि जल्द ही बाजार में सप्लाई सामान्य हो जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि घरेलू एलपीजी (लाल सिलेंडर) की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और आम जनता को घबराने की जरूरत नहीं है।
फिलहाल स्थिति चुनौतीपूर्ण है। एक तरफ युद्ध के कारण वैश्विक दबाव है, तो दूसरी तरफ शादी-ब्याह के सीजन ने मांग को चरम पर पहुंचा दिया है। अब देखना यह है कि क्या “पारंपरिक ईंधन” का यह फॉर्मूला आधुनिक रसोई में टिक पाएगा या नहीं।