पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने वैश्विक बाजारों में बड़ी हलचल पैदा कर दी है। तेल आपूर्ति पर पड़े असर के कारण पूरी दुनिया के वित्तीय बाजारों में घबराहट का माहौल देखने को मिल रहा है। इसी का असर सोमवार 9 मार्च को एशियाई शेयर बाजारों में साफ दिखाई दिया, जहां ज्यादातर प्रमुख इंडेक्स भारी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के चलते निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा है, जिससे जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाने का रुझान बढ़ता दिख रहा है।
भारतीय शेयर बाजार के लिए भी शुरुआती संकेत अच्छे नहीं माने जा रहे हैं। प्री-ओपन संकेत देने वाला GIFT Nifty करीब 824 अंक यानी 3.47% की बड़ी गिरावट के साथ 23,750 के आसपास ट्रेड करता दिखा। इतनी बड़ी गिरावट यह दर्शाती है कि घरेलू बाजार में आज शुरुआत से ही दबाव देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ग्लोबल संकेतों में सुधार नहीं होता है तो बाजार में शुरुआती घंटे में ही भारी बिकवाली का माहौल बन सकता है।
अनुमान लगाया जा रहा है कि भारतीय बाजार आज तेज गैप-डाउन के साथ खुल सकते हैं। पिछले कारोबारी दिन 6 मार्च की क्लोजिंग को आधार मानें तो निफ्टी में करीब 750 से 850 अंकों तक की गिरावट के साथ ओपनिंग संभव है। वहीं सेंसेक्स में भी लगभग 2,300 से 2,700 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत होने की आशंका जताई जा रही है। अगर ऐसा होता है तो बाजार में शुरुआती कारोबार में करीब 3% से 3.5% तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है।
एशियाई बाजारों में आज भारी बिकवाली का माहौल बना हुआ है। जापान का प्रमुख इंडेक्स Nikkei 225 करीब 6.89% की गिरावट के साथ 52,035 के स्तर पर आ गया है। दक्षिण कोरिया का KOSPI भी 7.04% टूटकर 5,217 पर पहुंच गया। ताइवान का Taiwan Weighted Index करीब 6.05% गिरकर 31,681 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। वहीं हांगकांग का Hang Seng भी 2.47% की गिरावट के साथ 25,136 पर ट्रेड कर रहा है। एशिया में इस तरह की तेज गिरावट यह दिखाती है कि निवेशक फिलहाल जोखिम उठाने से बच रहे हैं।
अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी का माहौल बना हुआ है। Dow Jones Futures करीब 1,038 अंक यानी 2.19% की गिरावट के साथ 46,463 पर पहुंच गया है। वहीं S&P 500 में भी 1.33% की गिरावट दर्ज की गई और यह 6,740 के स्तर पर आ गया। टेक्नोलॉजी कंपनियों से जुड़ा Nasdaq इंडेक्स 1.53% फिसलकर 22,400 तक पहुंच गया है। मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक इन इंडेक्स का ट्रेंड फिलहाल “Very Bearish” नजर आ रहा है, जो वैश्विक बाजारों में बढ़ते जोखिम की ओर संकेत करता है।
यूरोपीय शेयर बाजारों में भी पिछले कारोबारी सत्र में कमजोरी दर्ज की गई। ब्रिटेन का FTSE इंडेक्स 1.26% गिरकर 10,284 के स्तर पर बंद हुआ। फ्रांस का CAC इंडेक्स 0.65% फिसलकर 7,993 पर बंद हुआ, जबकि जर्मनी का DAX इंडेक्स भी 0.95% की गिरावट के साथ 23,591 के स्तर पर आ गया। यूरोप के इन प्रमुख बाजारों का टेक्निकल ट्रेंड भी फिलहाल कमजोर दिखाई दे रहा है, जिसे बाजार विशेषज्ञ “Bearish से Very Bearish” की श्रेणी में रख रहे हैं।
कमोडिटी बाजार में सबसे बड़ा उछाल कच्चे तेल की कीमतों में देखने को मिला है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी वजह से Brent Crude करीब 24.16% की बड़ी तेजी के साथ 115 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया। वहीं Crude Oil की कीमत भी लगभग 24.60% बढ़कर 113 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रही है। तेल की कीमतों में इस तरह का तेज उछाल वैश्विक महंगाई को और बढ़ा सकता है, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।