देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचान बनाने वाले इंदौर में भागीरथपुरा क्षेत्र से आई यह खबर हर किसी को झकझोर देने वाली है। दूषित पानी के कारण इलाके में अब तक 8 लोगों की मौत की चर्चा सामने आ चुकी है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन हरकत में आ गया है। भागीरथपुरा के हालात ऐसे हैं कि लोगों के मन में डर इस कदर बैठ गया है कि वे अब पानी पीने से भी हिचकिचा रहे हैं।
नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए सर्वे में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। 2700 से अधिक घरों में सर्वे किया गया, जिसमें 1200 से ज्यादा लोग बीमार पाए गए। यानी लगभग हर घर में कोई न कोई व्यक्ति बीमारी से जूझ रहा है। पेट दर्द, उल्टी-दस्त और तेज बुखार जैसी शिकायतें आम हो चुकी हैं। इलाके में फैली इस बीमारी ने लोगों की दिनचर्या पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दी है।
स्थिति को संभालने के लिए मंगलवार को नगर निगम की ओर से टैंकरों के जरिए पीने के पानी की सप्लाई की गई। लेकिन स्थानीय रहवासियों का निगम पर भरोसा पूरी तरह टूट चुका है। लोगों ने टैंकर से आए पानी को पीने से साफ इनकार कर दिया। अधिकांश परिवार अब आरओ का पानी मंगवाकर पीने को मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि जब तक पानी की गुणवत्ता को लेकर पूरी तरह भरोसा नहीं हो जाता, तब तक वे निगम के पानी का उपयोग नहीं करेंगे।
बीमारी और मौतों की खबरों ने पूरे भागीरथपुरा इलाके को सन्नाटे में डुबो दिया है। रहवासियों का दर्द छलक रहा है। उनका कहना है कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि पानी की वजह से उनके इलाके में जानें जाएंगी। कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन समय रहते जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया। अब हालात ऐसे बन गए हैं कि हर गली में डर और चिंता का माहौल है।
स्वास्थ्य विभाग ने हालात की गंभीरता को देखते हुए 14 गलियों में मेडिकल टीमें उतार दी हैं। डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ ने घर-घर जाकर मरीजों की जांच की और जरूरत के अनुसार इलाज भी किया। गंभीर मरीजों को एम्बुलेंस की मदद से अस्पतालों में भर्ती कराया गया। आशा कार्यकर्ताओं द्वारा क्लोरिन टैबलेट, जिंक की गोलियां और ओआरएस के पैकेट बांटे जा रहे हैं। माइकिंग के जरिए लोगों को उबला हुआ पानी पीने, बाहर का खाना न खाने और लक्षण दिखते ही स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने की समझाइश दी जा रही है।
अब तक 111 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती किया जा चुका है, जिनमें से 35 की हालत गंभीर बताई जा रही है। शासकीय और निजी दोनों तरह के अस्पतालों में मरीजों का इलाज जारी है। प्रभावित क्षेत्र में फिलहाल 4 एंबुलेंस तैनात की गई हैं। इसके साथ ही 14 डॉक्टर और पेरामेडिकल स्टाफ लगातार इलाके में मौजूद हैं। एमवाय अस्पताल के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के डॉक्टर भी इस राहत कार्य में जुटे हुए हैं।
जांच टीम के अनुसार कुल 2703 घरों का सर्वे किया गया और करीब 12 हजार लोगों की स्वास्थ्य जांच हुई। इनमें से 1146 मरीजों को मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। राहत की बात यह है कि 18 मरीज इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में लोग बीमारी से जूझ रहे हैं।
अस्पतालों में भर्ती मरीजों की हालत बेहद परेशान करने वाली है। कई मरीजों को इतनी ज्यादा उल्टियां हो रही हैं कि उन्हें बेड पर ही बाल्टी रखनी पड़ रही है। कमजोरी के कारण बार-बार उठ पाना तक मुश्किल हो गया है। वर्मा अस्पताल में जहां 22 बेड की क्षमता है, वहां करीब 35 मरीजों का इलाज चल रहा है। हालांकि समय पर इलाज मिलने से कुछ मरीज ठीक होकर घर भी लौट चुके हैं।
कुल मिलाकर, भागीरथपुरा में फैली यह बीमारी न सिर्फ स्वास्थ्य विभाग बल्कि पूरे प्रशासन के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। स्वच्छता के लिए मशहूर इंदौर में इस तरह की घटना ने लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया है, और अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि हालात को पूरी तरह काबू में लाने के लिए आगे क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।