इंदौर में खाकी वर्दी की साख पर गहरा सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि दो सिपाहियों ने सोनकच्छ के बदमाशों के साथ मिलकर एक युवा क्रिप्टो ट्रेडर को यूएसडीटी खरीदने के बहाने बुलाया, फिर कथित तौर पर उसे और उसके भाई को अगवा कर नकदी और डिजिटल करंसी लूट ली। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हुई। दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि दोनों पुलिसकर्मियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
खजराना निवासी अब्दुल फहाद, जो क्रिप्टो ट्रेडिंग से जुड़ा है, शनिवार शाम अपने भाई जुनैद के साथ चंद्रलोक चौराहा स्थित एटीएम पर अपनी मां के खाते में करीब ढाई लाख रुपये जमा करने पहुंचा था। वह एटीएम के भीतर पैसे जमा कर रहा था, तभी साहिल नाम का एक युवक अंदर आया। कुछ ही देर में बुलेट मोटरसाइकिल पर दो वर्दीधारी भी पहुंचे। उन्होंने खुद को पुलिस बताते हुए सख्ती दिखाई और जांच के नाम पर दोनों भाइयों को अपने साथ चलने को कहा। इसके बाद तीनों को अलग-अलग वाहनों में बैठाकर एक सुनसान स्थान पर ले जाया गया।
आरोप है कि वहां बैग की तलाशी ली गई और करीब दो लाख रुपये नकद निकाल लिए गए। इसके बाद मोबाइल फोन छीनकर बाइनेंस ऐप खोला गया और 4000 यूएसडीटी नावेद लोधी के अकाउंट में ट्रांसफर करवा ली गई। पीड़ितों को कथित तौर पर यह कहकर डराया गया कि वे अवैध गतिविधि में शामिल हैं और उन्हें जेल भेज दिया जाएगा। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। घर पहुंचने पर फहाद ने तुरंत ट्रांजेक्शन को होल्ड कराया, वकील से सलाह ली और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत मिलते ही पलासिया पुलिस ने एटीएम और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। फुटेज में बुलेट पर आए दोनों वर्दीधारी साफ दिखाई दिए। तस्वीरें पुलिस ग्रुप में साझा की गईं तो उनकी पहचान एमआईजी थाने में पदस्थ अविनाश चंद्रवंशी और डीसीपी ऑफिस में अटैच मनोज मालवीय के रूप में हुई। दोनों को थाने बुलाया गया और पीड़ित से शिनाख्त कराई गई, जहां पहचान की पुष्टि हो गई। इसके बाद नावेद और साहिल को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ में नावेद लोधी ने बताया कि सिपाही मनोज उसका बचपन का दोस्त है। कथित तौर पर मनोज ने ही “बड़ा काम” करने की बात कही थी। 6 फरवरी को इंदौर आने के बाद नावेद ने मनोज, अविनाश और साहिल को जानकारी दी कि फहाद क्रिप्टो करंसी का काम करता है। इसके बाद योजना बनी कि यूएसडीटी खरीदने के बहाने उसे बुलाया जाएगा और मौके पर डराकर लूट की जाएगी। तय योजना के तहत एटीएम लोकेशन चुनी गई और वहीं वारदात को अंजाम दिया गया।
मामले में यह भी सामने आया कि शुरुआती स्तर पर आरोपियों के खिलाफ शिकायत सीमित रखने का दबाव बनाया गया, लेकिन पीड़ित ने चारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने पर अड़ा रहा। अंततः नावेद, साहिल और दोनों सिपाहियों के खिलाफ लूट समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया।
दोनों बदमाशों की गिरफ्तारी हो चुकी है और पुलिसकर्मी हिरासत में हैं। विभागीय जांच के साथ सस्पेंशन और आगे की कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि वर्दी की आड़ में अपराध करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और निष्पक्ष जांच के बाद सख्त कदम उठाए जाएंगे।