इंदौर में आयकर विभाग की बड़ी कार्रवाई, सरकारी ठेके लेने वाली कंस्ट्रक्शन कंपनियों पर एकसाथ छापेमारी

सड़क निर्माण से लेकर बड़े सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के ठेके लेने वाली कंपनियां अब आयकर विभाग के रडार पर आ गई हैं। शुक्रवार सुबह आयकर विभाग की इन्वेस्टिगेशन विंग ने शहर में एक साथ बड़ी कार्रवाई करते हुए चार प्रमुख निर्माण कंपनियों से जुड़े कई ठिकानों पर जांच शुरू की। अचानक हुई इस कार्रवाई से कारोबार जगत में हलचल मच गई, वहीं संबंधित कंपनियों के दफ्तरों और आवासों पर गतिविधियां ठप हो गईं।

आयकर विभाग की टीमें बीआर गोयल इंफ्रास्ट्रक्चर, केजी गुप्ता इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, बिंदल डेवलपमेंट एंड कंस्ट्रक्शन और लक्ष्मी स्टील से जुड़े 12 से अधिक ठिकानों पर एक साथ पहुंचीं। इनमें इंदौर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों के अलावा देवास जिले के कन्नौद स्थित एक कंपनी कार्यालय भी शामिल है। इसके साथ ही इंदौर के विक्रम टावर में स्थित एक कंपनी सेक्रेटरी के दफ्तर पर भी आयकर की टीम ने दस्तक दी, जहां से महत्वपूर्ण कागजात खंगाले गए।

जांच शुरू होने के कुछ ही घंटों बाद आयकर विभाग ने कार्रवाई का दायरा और बढ़ा दिया। शुरुआती इनपुट के आधार पर शाम तक कुछ और ठिकानों को जांच में शामिल किया गया। कुल मिलाकर आयकर विभाग के 70 से ज्यादा अधिकारी और कर्मचारी लगभग 20 अलग-अलग स्थानों पर एक साथ दस्तावेजों की गहन पड़ताल करते नजर आए। इस दौरान कंपनियों के डायरेक्टरों, उनसे जुड़े कार्यालयों और अन्य संबंधित लोगों के पास मौजूद वित्तीय रिकॉर्ड भी खंगाले गए।

जांच के दायरे में आई ये कंपनियां मुख्य रूप से सरकारी एजेंसियों के लिए सड़क, हाईवे, पुल और अन्य बड़े निर्माण कार्यों के ठेके लेती रही हैं। नगर निगम, इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) और मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) जैसी संस्थाओं के लिए भी इन कंपनियों ने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम किया है। बताया जा रहा है कि वर्तमान में भी इन कंपनियों के पास लगभग दो हजार करोड़ रुपये के निर्माण कार्यों के ठेके हैं, जिससे इस कार्रवाई की गंभीरता और बढ़ जाती है।

पहले दिन की जांच में आयकर विभाग को बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक डेटा, महत्वपूर्ण दस्तावेज और निजी डायरी हाथ लगी हैं। अधिकारियों ने अलग-अलग ठिकानों से नकदी भी बरामद की है, हालांकि फिलहाल विभाग ने नकदी का आधिकारिक रूप से जब्ती नहीं की है। आयकर अधिकारियों ने संबंधित पक्षों से नकदी का हिसाब मांगा है और यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो नकदी को आयकर अधिनियम के तहत जब्त किया जा सकता है।

सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई टैक्स चोरी, बेहिसाब आय और खर्चों से जुड़े मामलों को लेकर की जा रही है। फिलहाल आयकर विभाग की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस पूरे मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।