भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर वैश्विक व्यापार जगत की निगाहें टिकी हुई हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्ष व्यापारिक सुगमता बढ़ाने के लिए लगभग 90 प्रतिशत उत्पादों पर आयात शुल्क यानी टैरिफ कम करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। यह समझौता न केवल भारत के निर्यात क्षेत्र को नई ऊर्जा देगा, बल्कि रक्षा, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भी सहयोग के नए मानक स्थापित करेगा।
नई दिल्ली और ब्रुसेल्स के बीच चल रही इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा व्यापारिक ढांचा तैयार करना है, जो दोनों पक्षों के लिए लाभकारी हो। भारत विशेष रूप से अपने श्रम-प्रधान उद्योगों जैसे कपड़ा, हस्तशिल्प और चमड़ा क्षेत्र के लिए यूरोपीय बाजारों में शून्य-शुल्क पहुंच की मांग कर रहा है। वर्तमान में, इन क्षेत्रों को अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में उच्च टैरिफ का सामना करना पड़ता है, जिसे कम करने से भारतीय उत्पादों की मांग में भारी उछाल आने की संभावना है।
रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार
प्रस्तावित समझौते में वस्तुओं के व्यापार के अलावा सेवाओं और निवेश पर भी गहरा ध्यान दिया जा रहा है। रक्षा क्षेत्र में भारत यूरोपीय देशों के साथ तकनीकी हस्तांतरण और संयुक्त उत्पादन को बढ़ावा देना चाहता है। वहीं, ऊर्जा क्षेत्र में ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश को लेकर भी व्यापक चर्चा हो रही है। यह भारत के नेट-जीरो लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।
मोबिलिटी और पेशेवरों के लिए नए अवसर
भारत की एक प्रमुख मांग ‘मोबिलिटी एंड माइग्रेशन’ को लेकर है। भारत चाहता है कि उसके आईटी पेशेवरों, इंजीनियरों और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के कर्मियों को यूरोपीय संघ के देशों में काम करने के लिए सुगम वीजा प्रक्रिया और बेहतर अवसर मिलें। यदि यह समझौता सफल रहता है, तो भारतीय सेवा क्षेत्र के लिए यूरोप एक बड़ा हब बनकर उभरेगा।
चुनौतियां और भविष्य की राह
हालांकि, वार्ता के दौरान कुछ संवेदनशील मुद्दों पर असहमति भी बनी हुई है। यूरोपीय संघ की ओर से भारत में निर्मित ऑटोमोबाइल, वाइन और स्पिरिट्स पर लगने वाले उच्च सीमा शुल्क को कम करने का दबाव है। इसके साथ ही, पर्यावरण और श्रम मानकों को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच विस्तृत चर्चा जारी है। भारत का रुख स्पष्ट है कि वह अपने घरेलू उत्पादकों और किसानों के हितों से समझौता किए बिना एक संतुलित समझौते की ओर बढ़ना चाहता है।
यूरोपीय संघ भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है और इस FTA के लागू होने के बाद द्विपक्षीय व्यापार के आंकड़ों में रिकॉर्ड वृद्धि की उम्मीद है। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) में एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में स्थापित करेगा। आगामी दौर की वार्ताओं में इन तकनीकी बारीकियों को सुलझाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, ताकि जल्द से जल्द समझौते को अंतिम रूप दिया जा सके।