भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 709 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर, रेमिटेंस में भी 135 अरब डॉलर की बड़ी हिस्सेदारी

भारत ने एक बार फिर अपनी आर्थिक ताकत का प्रदर्शन किया है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। 23 जनवरी को समाप्त हुए सप्ताह में यह भंडार 709.41 अरब डॉलर हो गया।

इस दौरान विदेशी मुद्रा भंडार में 8.05 अरब डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह आंकड़ा भारत की आर्थिक स्थिरता और वैश्विक निवेशकों के भरोसे को साफ तौर पर दर्शाता है।

रेमिटेंस में भारत दुनिया में अव्वल

विदेशी मुद्रा भंडार के साथ-साथ रेमिटेंस के मामले में भी भारत दुनिया का पावरहाउस बनकर उभरा है। देश में विदेशों से भेजी जाने वाली धनराशि यानी रेमिटेंस 135 अरब डॉलर तक पहुंच गई है।

दुनियाभर में रहने वाले भारतीय प्रवासी अपने परिवारों को नियमित रूप से धन भेजते हैं। इससे देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिलता है। रेमिटेंस के मामले में भारत लगातार अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहा है।

विदेशी मुद्रा भंडार का महत्व

विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक सेहत का अहम पैमाना होता है। इससे आयात बिल का भुगतान करने की क्षमता का पता चलता है। साथ ही यह विदेशी कर्ज चुकाने में भी मददगार होता है।

मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार रुपये की स्थिरता बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। जब भी रुपये पर दबाव बढ़ता है तो RBI इस भंडार का इस्तेमाल करता है।

वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती साख

709 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार भारत को दुनिया के शीर्ष देशों की कतार में खड़ा करता है। इससे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भारत पर भरोसा और मजबूत होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारत की आर्थिक स्थिति और बेहतर होगी। सरकार की नीतियां और सुधार इस दिशा में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

आर्थिक मजबूती के संकेत

विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है। यह दर्शाता है कि विदेशी निवेश भारत में बढ़ रहा है। निर्यात में भी सुधार हो रहा है।

रेमिटेंस और विदेशी मुद्रा भंडार दोनों मिलकर भारत को एक आर्थिक महाशक्ति के रूप में स्थापित कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में यह रुझान और तेज होने की उम्मीद है।