– राजकुमार जैन, यातायात प्रबंधन मित्र
हमें आए दिन सड़क हादसों के समाचार मिलते है। इन हादसों में लोग अपंग हो जाते है और अपनी जान भी गंवा देते हैं। यही कारण है कि अक्सर सड़क पर सतर्क रहने और संभल कर चलने की हिदायतें दी जाती हैं। सड़क सुरक्षा के उपायों पर अमल करने की सलाह भी दी जाती है। लेकिन इस बाद भी खतरनाक ड्राइविंग के मामले सामने आते रहते हैं।
अंतरराष्ट्रीय ड्राइवर प्रशिक्षण कंपनी जुटोबी की 2024 के लिए जारी वार्षिक रिपोर्ट में भारत को सड़क पर वाहन चलाने में सुरक्षा की दृष्टि से 49 वाँ स्थान मिला है। जुटोबी ने 53 देशों में किए गए शोध के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार की है। जिसके अनुसार, 53 वें स्थान पर दक्षिण अफ्रीका है जो गाड़ी चलाने के लिए दुनिया का सबसे खतरनाक देश है। इस सूची के अनुसार सबसे खतरनाक ड्राइविंग के मामले में भारत 5वें स्थान पर है।
इससे पहले भी विभिन्न रिपोर्टों में भारत की स्थिति अच्छी नहीं रही है। विश्व बैंक की 2021 में आई एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार भारत में दुनिया के एक प्रतिशत वाहन हैं लेकिन सड़कों पर वाहन दुर्घटनाओं के चलते विश्वभर में होने वाली मौतों में 11 प्रतिशत मौतें भारत में होती हैं। वहीं सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक कैलेंडर वर्ष 2022 के दौरान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) द्वारा कुल 4,61,312 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 1,68,491 लोगों की जान गई और 4,43,366 लोग घायल हुए। 2022 में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में वर्ष 2021 की तुलना में 11.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसी तरह, सड़क दुर्घटनाओं के कारण होने वाली मौतों और चोटों की संख्या में भी क्रमशः 9.4 प्रतिशत और 15.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई ये आँकड़े औसतन हर दिन 1,264 दुर्घटनाएँ और 462 मौतें या हर घंटे 53 दुर्घटनाएँ और 19 मौतें दर्शाते हैं।
जुटोबी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि शोध में उसने हाईवे पर गति सीमा, ड्राइवरों के लिए रक्त में अल्कोहल की मात्रा की सीमा और सड़क यातायात मृत्यु दर जैसे संकेतकों के आधार पर देशों का विश्लेषण किया। ताकि वाहन चलाने के लिए दुनिया के सबसे सुरक्षित और सबसे खतरनाक देशों का निर्धारण किया जा सके।
इस रिपोर्ट में इस भयावह स्थिति के तीन प्रमुख कारण बताए गए हैं लेकिन देखा जाय तो मूल कारण एक ही निकल कर आता है:
1. ट्रेफिक नियमों की अनदेखी
2. तेज रफ्तार (यह भी ट्रेफिक नियमों की अनदेखी का ही हिस्सा है)
3. नशा कर वाहन चलाना (यह भी ट्रेफिक नियमों की अनदेखी का ही हिस्सा है)
वस्तुत: ट्रेफिक नियमों की अनदेखी ही एकमात्र कारण है सड़क दुर्घटनाओं में बड़ी संख्या में हो रही मौतों का।
हमारे देश में माता पिता और अभिभावक बच्चों के साथ वाहन चलाते समय स्वयं नियम उल्लंघन करते हैं तो नन्ही उम्र से ही बच्चों में यातायात नियमों के प्रति उपेक्षा का भाव भर जाता है जिसे बाद में उनके मन से निकालना संभव नहीं होता।
ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल में लगने वाली सुरक्षित वाहन चालन प्रशिक्षण की फीस भरने को हम भारतीय फिजूल खर्च समझते है और अपने बच्चों को ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल भेजते से बचाते हैं। कई लोगों को तो यह पता भी नहीं होता कि ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल जैसी कोई संस्था भी होती है। इन हालातों में स्टूडेंट की कमी के चलते ये ट्रेनिंग स्कूल धड़ाधड़ बंद हो रहे हैं और अब हर शहर में गिनती के ट्रेनिंग स्कूल बचे हैं जो आय और संसाधनों की कमी से जूझते हुए बंद होने की कगार पर हैं।
मुद्दे की बात यह है कि यदि सही प्रशिक्षण ही नहीं दिलवाया तो कैसे एक सुरक्षित ढंग से वाहन चलाने वाले ड्राइवर की कल्पना की जा सकती है। अप्रशिक्षित ड्राइवर को नियमों की पूरी जानकारी ही नहीं होती और वो गलती कर स्वयं हादसे का शिकार होता है और दूसरों के लिए भी खतरा पैदा करता है। इनके बच्चे भी बड़े होकर एक अनाड़ी ड्राइवर के रूप में खतरनाक ड्राइविंग करते हैं।
यह एक ऐसा अंतहीन सिलसिला है जो पिछले कई सालों से अनवरत चल रहा है। इसके खात्मे की शुरुआत हमें हमारे घर से ही करना होगी। हमें अपने बच्चों को दोपहिया, तिपहिया या चौपहिया वाहन दिलवाने से पहले उनकी सुरक्षा के लिए समुचित ड्राइविंग प्रशिक्षण दिलवाने की शुरुआत करना होगी अन्यथा सड़क हादसों में यूं ही मरते रहेंगे लोग और दुख भोगते रहेंगे उनके परिवार।
हमारे परिवारों में किए जाने वाले अन्य संस्कारों की सूची में यातायात नियम पालन संस्कार को भी प्रमुखता से शामिल करना होगा। यह ध्यान रखना होगा कि जब बच्चे साथ हो तब वाहन सावधानी से नियम पूर्वक चलाना होगा ताकि बच्चों मन में इन सुरक्षा नियमों के प्रति उपेक्षा और अनादर की बजाय आदर का भाव जागे और बड़े होकर वो एक सुरक्षित ड्राइवर बनें।