ग्लोबल इकोनॉमी में भारत को झटका: IMF रैंकिंग में छठे स्थान पर खिसका देश, कच्चे तेल और डॉलर की मजबूती ने बढ़ाई टेंशन

नई दिल्ली: वैश्विक उथल-पुथल और ईरान-इजराइल संघर्ष के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर एक बड़ी खबर सामने आई है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के ताजा ग्लोबल जीडीपी डेटा के मुताबिक, भारत अब दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है।
गौरतलब है कि पिछले साल भारत ने रैंकिंग में सुधार करते हुए कुछ समय के लिए चौथी पायदान तक अपनी जगह बनाई थी, लेकिन वर्तमान वैश्विक संकट के कारण रैंकिंग में यह गिरावट दर्ज की गई है।
रैंकिंग में गिरावट की क्या है बड़ी वजह?
आईएमएफ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की जीडीपी फिलहाल 2.25 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है। रैंकिंग में इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण ‘डॉलर’ की बढ़ती ताकत और ‘रुपये’ का गिरता स्तर है।
  • डॉलर का दबाव: वैश्विक स्तर पर डॉलर के मजबूत होने से रुपया दबाव में है।
  • कच्चा तेल: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने आयात बिल बढ़ा दिया है, जिससे व्यापार घाटा (Trade Deficit) गहरा गया है। यदि रुपया स्थिर रहता, तो ग्लोबल मार्केट में भारत की रैंकिंग और बेहतर हो सकती थी।
दुनिया की टॉप 5 अर्थव्यवस्थाएं (ताजा रैंकिंग):
  1. अमेरिका
  2. चीन
  3. जापान
  4. जर्मनी
  5. यूनाइटेड किंगडम (UK)
  6. भारत
एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स: क्या भारत अब भी मजबूत है?
रैंकिंग में गिरावट के बावजूद, दिग्गज रेटिंग एजेंसी एसएंडपी (S&P) ग्लोबल रेटिंग्स ने भारत की विकास दर को लेकर सकारात्मक भरोसा जताया है।
  • 130 डॉलर का तेल भी नहीं रोक पाएगा रफ्तार: एसएंडपी के निदेशक यी फर्न फुआ के मुताबिक, यदि युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें 130 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच जाती हैं, तब भी भारतीय अर्थव्यवस्था 6.3% की दर से बढ़ेगी।
  • 7.1% ग्रोथ का लक्ष्य: यदि तेल की कीमतें 85 डॉलर के आसपास रहती हैं, तो वित्त वर्ष 2026-27 में भारत 7.1% की विकास दर हासिल कर सकता है। यह दुनिया की किसी भी प्रमुख अर्थव्यवस्था की तुलना में सबसे तेज रफ्तार होगी।
भविष्य की राह: चुनौतियां और उम्मीद
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के सामने अब दोहरी चुनौती है। पहली—अपनी जीडीपी ग्रोथ को 7-8% के स्तर पर वापस लाना, और दूसरी—रुपये की अस्थिरता को नियंत्रित करना।
हालाकि, भारत की संप्रभु साख रेटिंग (Sovereign Credit Rating) पर कोई खतरा नहीं है, क्योंकि लंबी अवधि में भारत अपनी राजकोषीय स्थिति को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। भले ही रैंकिंग में वर्तमान में भारत छठे स्थान पर है, लेकिन इसकी विकास दर अभी भी प्रमुख देशों के मुकाबले सबसे अधिक बनी हुई है।