रेलवे का नया नियम: स्टेशन मास्टर को ‘रन थ्रू’ ट्रेनों की घोषणा करनी होगी, लोको पायलटों के परिवारों से भी खास अपील

भारतीय रेलवे ने यात्री सुरक्षा और परिचालन दक्षता को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब रेलवे स्टेशनों से बिना रुके गुजरने वाली यानी ‘रन थ्रू’ ट्रेनों की घोषणा करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह फैसला अक्सर होने वाली दुर्घटनाओं और यात्रियों की लापरवाही को देखते हुए लिया गया है। रेलवे बोर्ड का मानना है कि इससे न केवल हादसों में कमी आएगी, बल्कि स्टेशन परिसर में सुरक्षा का वातावरण भी मजबूत होगा।

रेलवे के इस नए आदेश के मुताबिक, स्टेशन मास्टरों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी सुपरफास्ट या एक्सप्रेस ट्रेन के गुजरने से पहले प्लेटफॉर्म पर मौजूद यात्रियों को सतर्क किया जाए। अक्सर देखा गया है कि यात्री पटरियों के करीब खड़े रहते हैं या पटरी पार करने की कोशिश करते हैं, जो तेज रफ्तार ट्रेन के आने पर जानलेवा साबित होता है। अब पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिए लगातार चेतावनी जारी की जाएगी।

लोको पायलटों के परिवारों से भावुक अपील

इस तकनीकी और प्रशासनिक बदलाव के साथ-साथ रेलवे ने एक मानवीय पहल भी की है। रेलवे प्रशासन ने लोको पायलटों (ट्रेन ड्राइवरों) के परिवारों के लिए एक विशेष परामर्श जारी किया है। इसमें कहा गया है कि जब लोको पायलट ड्यूटी पर जाने के लिए घर से निकलें, तो परिवार वाले उनसे किसी भी तरह का विवाद या झगड़ा न करें।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि लोको पायलट का काम अत्यधिक एकाग्रता और जिम्मेदारी का होता है। अगर वे घर से तनाव या गुस्से में निकलेंगे, तो इसका सीधा असर उनकी मानसिक स्थिति पर पड़ेगा। इससे ट्रेन संचालन में चूक होने की संभावना बढ़ जाती है, जो हजारों यात्रियों की जान खतरे में डाल सकती है।

सुरक्षा को लेकर नई गाइडलाइन्स

रेलवे की नई गाइडलाइन्स में स्पष्ट निर्देश हैं कि रन थ्रू ट्रेनों के गुजरते समय स्टेशन स्टाफ को भी मुस्तैद रहना होगा। इसके अलावा, लोको पायलटों के रेस्ट रूम्स (Running Rooms) में भी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि उन्हें पर्याप्त आराम मिल सके। रेलवे का यह प्रयास न केवल तकनीकी सुरक्षा को मजबूत करता है, बल्कि कर्मचारियों की मानसिक सेहत का भी ध्यान रखता है।

गौरतलब है कि हाल के दिनों में कई रेल हादसों के पीछे मानवीय भूल या तनाव को एक कारण माना गया है। ऐसे में रेलवे का यह कदम लोको पायलटों को मानसिक रूप से स्वस्थ और तनावमुक्त रखने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास है। अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि इन उपायों से ट्रेन संचालन अधिक सुरक्षित और सुचारू हो सकेगा।