मार्च से वंदे भारत और शताब्दी में बड़ा बदलाव, यात्रियों को अब बायोडिग्रेडेबल थाली में मिलेगा भोजन

भारतीय रेलवे ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। मार्च महीने से देश की कई प्रमुख प्रीमियम ट्रेनों में यात्रियों को भोजन परोसने के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। अब भोपाल से गुजरने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस और बेंगलुरु राजधानी जैसी ट्रेनों में प्लास्टिक की प्लेटों की जगह बायोडिग्रेडेबल थालियों का उपयोग किया जाएगा।

रेलवे बोर्ड के इस निर्णय का उद्देश्य ट्रेनों में प्लास्टिक कचरे को कम करना और इको-फ्रेंडली यात्रा को बढ़ावा देना है। अधिकारियों के अनुसार, यह नई व्यवस्था मार्च के पहले सप्ताह से लागू होने की उम्मीद है। शुरुआत में इसे चुनिंदा प्रीमियम ट्रेनों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जा रहा है, जिसके सफल होने पर इसे अन्य लंबी दूरी की ट्रेनों में भी विस्तार दिया जाएगा।

गन्ने की खोई से बनी होंगी थालियां

रेलवे द्वारा अपनाई जा रही ये नई थालियां पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल होंगी। जानकारी के मुताबिक, ये डिस्पोजेबल प्लेटें गन्ने की खोई (Bagasse) से तैयार की गई हैं। गन्ने की खोई वह अवशेष होता है जो रस निकालने के बाद बच जाता है। इससे बनी क्रॉकरी न केवल मजबूत होती है, बल्कि उपयोग के बाद आसानी से नष्ट भी हो जाती है, जिससे प्रदूषण नहीं फैलता।

अभी तक ट्रेनों में अक्सर प्लास्टिक या एल्युमिनियम फॉयल के कंटेनरों का उपयोग किया जाता था, जो बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करते थे। नई बायोडिग्रेडेबल थालियां मिट्टी में मिल जाने पर खाद का काम करेंगी, जो पर्यावरण के लिए एक सुरक्षित विकल्प है।

इन ट्रेनों में होगा बदलाव

रेलवे के इस फैसले का असर भोपाल मंडल से गुजरने वाली कई हाई-प्रोफाइल ट्रेनों पर पड़ेगा। इनमें रानी कमलापति-हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस, भोपाल-नई दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस और हजरत निजामुद्दीन-बेंगलुरु राजधानी एक्सप्रेस शामिल हैं। इन ट्रेनों में खानपान की सेवा प्रीमियम स्तर की होती है, और अब क्रॉकरी में बदलाव से यात्रियों को एक नया अनुभव मिलेगा।

प्लास्टिक मुक्त रेलवे का लक्ष्य

रेलवे पिछले कुछ समय से ‘सिंगल यूज प्लास्टिक’ को खत्म करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। स्टेशनों पर प्लास्टिक की बोतलों को क्रश करने वाली मशीनें लगाने से लेकर कुल्हड़ में चाय देने की पहल तक, कई कदम उठाए गए हैं। बायोडिग्रेडेबल थालियों का यह कदम इसी कड़ी का हिस्सा है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इससे न केवल कचरा प्रबंधन में मदद मिलेगी, बल्कि यह यात्रियों को स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक भी करेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि गन्ने की खोई से बनी थालियां गर्म भोजन के लिए भी सुरक्षित होती हैं और इनसे किसी प्रकार के हानिकारक रसायन निकलने का खतरा नहीं होता। रेलवे की यह पहल सस्टेनेबल डेवलपमेंट की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण पेश कर रही है।