“ईरान-इराक तनाव की भेंट चढ़ा भारतीय रुपया, टैंकर पर हमले के बाद $101 के पार पहुंचा कच्चा तेल”

Dollar vs Rupee: वैश्विक अनिश्चितता और आर्थिक दबाव के बीच भारतीय मुद्रा (रुपया) गुरुवार को अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और इराक के पास तेल टैंकर पर हमले की खबरों ने वैश्विक बाजार में हलचल मचा दी है, जिसका सीधा प्रहार रुपये की सेहत पर पड़ा है।
रुपये की ऐतिहासिक गिरावट
गुरुवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया भारी गिरावट के साथ 92.36 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर जा गिरा। कारोबार की शुरुआत ही कमजोरी के साथ 92.25 पर हुई थी, लेकिन देखते ही देखते यह पिछले बंद (92.01) के मुकाबले 31 पैसे टूट गया। निवेशकों में इस गिरावट को लेकर भारी चिंता देखी जा रही है।
क्यों मची है यह अफरा-तफरी?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये के टूटने के पीछे चार प्रमुख कारण जिम्मेदार हैं:
  1. कच्चे तेल की कीमतों में आग: ब्रेंट क्रूड लगभग 9.94% की छलांग लगाकर 101.12 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। भारत अपनी तेल जरूरतों का 80% आयात करता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ गई है।
  2. मिडिल ईस्ट में तनाव: इराक के समुद्री क्षेत्र में तेल टैंकर पर हमले की खबर ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर डर पैदा कर दिया है।
  3. शेयर बाजार में गिरावट: भारतीय शेयर बाजार में हाहाकार मचा हुआ है। BSE Sensex लगभग 992 अंक और Nifty 310 अंकों से ज्यादा टूट गया, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगाया है।
  4. विदेशी निवेशकों (FII) का पलायन: विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को ही बाजार से 6,267.31 करोड़ रुपये की भारी निकासी की है, जिससे घरेलू मुद्रा पर दबाव और बढ़ गया।

विशेषज्ञ की राय: भारत का बढ़ता आयात बिल और डॉलर की वैश्विक मजबूती रुपये के लिए ‘दोहरी मार’ साबित हो रही है। यदि कच्चे तेल की कीमतें $100 के पार बनी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ना तय है।

आने वाले दिनों में रुपये की चाल पूरी तरह से मिडिल ईस्ट के हालातों और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। यदि भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता, तो रिजर्व बैंक (RBI) को मुद्रा को संभालने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ सकता है। फिलहाल, बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।