Indore News : इंदौर में चिकित्सा जगत के लिए शुक्रवार का दिन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि लेकर आया। इरकाड सेंटर में तीसरे नेशनल हिप कोर्स और इंडोकॉन 2026 की शुरुआत हुई। इस आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण भव्य कैडेवरिक वर्कशॉप रही, जिसमें देशभर से आए 100 से अधिक डेलीगेट्स ने हिस्सा लिया।
यह पहला मौका है जब शहर में इतने बड़े स्तर पर कैडेवरिक हिप सर्जरी ट्रेनिंग का आयोजन किया गया है। तीन दिनों तक चलने वाली इस कॉन्फ्रेंस के ओपनिंग सेशन में आधुनिक हिप सर्जरी, ट्रॉमा केयर और मेडिकल साइंस की उभरती तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की गई।

इस वर्ष का पाठ्यक्रम विशेष रूप से युवा ऑर्थोपेडिक सर्जन्स, रेज़िडेंट डॉक्टरों और ज्वाइंट रिप्लेसमेंट के प्रशिक्षुओं को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य उन्हें वास्तविक एनाटॉमी पर अभ्यास करने का मौका देना है।
वर्कशॉप के दौरान प्रतिभागियों ने हिप प्रिज़र्वेशन, रिवीज़न आर्थ्रोप्लास्टी और मिनिमली इनवेसिव तकनीकों को गहराई से समझा। खास बात यह रही कि इस बार ट्रेनिंग में एआई आधारित प्री-ऑपरेटिव प्लानिंग, 3डी मॉडलिंग और इमेज-बेस्ड सर्जिकल तकनीकों को भी शामिल किया गया है।
विदेशी विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
इंडोकॉन के इतिहास में पहली बार इतने व्यापक स्तर पर कैडेवरिक सत्र आयोजित किए गए। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी की उपस्थिति ने प्रशिक्षण की गुणवत्ता को और बढ़ा दिया। इंग्लैंड से आए डॉ. अजय मालवीया और दक्षिण कोरिया के डॉ. यून ने अपने अनुभव साझा किए। इन विशेषज्ञों ने हिप आर्थ्रोस्कोपी, कम चीरा लगाने वाली तकनीकों (मिनिमली इनवेसिव) और जटिल हिप प्रक्रियाओं पर प्रकाश डाला।
प्रतिभागियों को नवीन उपकरणों और सुरक्षित सर्जिकल प्रोटोकॉल के रियल-टाइम डेमो देखने को मिले। विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि कैडेवरिक ट्रेनिंग से युवा सर्जनों का आत्मविश्वास बढ़ता है, जिससे मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
“इंडोकॉन के पहले ही दिन जिस तरह इंग्लैंड और साउथ कोरिया से आए विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए, उससे यह स्पष्ट होता है कि आज भारत भी वैश्विक मेडिकल स्टैंडर्ड्स के बराबर खड़ा है। इंदौर जैसे शहर में कैडेवरिक ट्रेनिंग, 3डी मॉडलिंग, प्री-ऑपरेटिव एआई प्लानिंग और उन्नत हिप तकनीकों का उपयोग होना इस बात का प्रमाण है कि हम विदेशी डॉक्टरों की तरह ही नई टेक्नोलॉजी को अपनाकर मेडिकल साइंस को आगे बढ़ा रहे हैं।” — डॉ. हेमंत मंडोवरा, ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन
लाइव डेमो: हिप प्रिज़र्वेशन तकनीक
पहले दिन के सत्र में हिप प्रिज़र्वेशन आर्थ्रोस्कोपी का लाइव डेमोंस्ट्रेशन चर्चा का विषय रहा। इसे इंग्लैंड के डॉ. अजय मालवीया ने इंदौर के युवा ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अर्जुन जैन के साथ मिलकर प्रस्तुत किया। इस सत्र में हिप जॉइंट की अंदरूनी संरचनाओं, लैबरल रिपेयर, कैम और पिंसर लीज़न सुधार जैसी प्रक्रियाओं को समझाया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि हिप प्रिज़र्वेशन तकनीक भविष्य में युवा मरीजों के लिए वरदान साबित होगी, क्योंकि इससे प्राकृतिक जोड़ को सुरक्षित रखा जा सकता है।
“इंदौर में इस स्तर की कैडेवरिक ट्रेनिंग का आयोजन होना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। इतनी संख्या में युवाओं का आना दर्शाता है कि हिप सर्जरी में नई पीढ़ी कितनी गंभीरता से अपनी स्किल बढ़ाना चाहती है। यह प्रशिक्षण भविष्य में उनके क्लिनिकल रिजल्ट्स को मजबूत बनाएगा और मरीजों को लाभ मिलेगा।” — डॉ. सुश्रुत बाभुलकर, सीनियर ऑर्थोपेडिक सर्जन