इंदौर में 1 मार्च को AAAS 12वीं राष्ट्रीय होम्योपैथी कॉन्फ्रेंस, AI और रिसर्च पर जोर

इंदौर में 1 मार्च 2026 को आयोजित AAAS 12वीं राष्ट्रीय होम्योपैथी कॉन्फ्रेंस–2026 में होम्योपैथी की वैज्ञानिकता, क्लीनिकल उपयोगिता और स्वास्थ्य व्यवस्था में उसकी संभावित भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई। आयोजकों के अनुसार शहर में पहली बार इस स्तर का राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ, जिसमें देश के कई राज्यों से चिकित्सक, शोधकर्ता और प्रतिनिधि शामिल हुए। सम्मेलन में एआई आधारित सहयोग, डिजिटल दस्तावेजीकरण और एविडेंस बेस्ड प्रैक्टिस को भविष्य की दिशा के रूप में रेखांकित किया गया।

आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. ए.के. द्विवेदी ने प्रतिभागियों और प्रतिनिधियों का आभार जताते हुए कहा कि सम्मेलन की सफलता सामूहिक भागीदारी से संभव हुई। उन्होंने अप्लास्टिक एनीमिया जैसे गंभीर मामलों में अपने उपचार अनुभव साझा किए। इसी सत्र में जयपुर के श्री लालाराम और उत्तर प्रदेश के एडवोकेट यशपाल सिंह का उल्लेख हुआ। यशपाल सिंह अपने पुत्र समर्थ के साथ कार्यक्रम में मौजूद रहे और उन्होंने उपचार से मिली राहत का सार्वजनिक उल्लेख किया।

सार्वजनिक स्वास्थ्य में भूमिका और नीति स्तर पर चर्चा

सम्मेलन में शामिल सांसद शंकर लालवानी ने अपने संबोधन में होम्योपैथी को सस्ती, सुलभ और दुष्प्रभाव रहित पद्धति बताया। उन्होंने कहा कि यह पद्धति आमजन के लिए उपयोगी साबित हो रही है और भारत की स्वास्थ्य जीवन रेखा बनने की क्षमता रखती है। उन्होंने इस विषय को लोकसभा में प्रमुखता से उठाने का आश्वासन भी दिया।

“होम्योपैथी सस्ती, सुलभ और दुष्प्रभाव रहित चिकित्सा पद्धति है, जो आमजन के लिए उपयोगी है। इसे नीति स्तर पर भी महत्व मिलना चाहिए।” — शंकर लालवानी, सांसद

डॉ. अथर्व द्विवेदी ने लाइफस्टाइल डिसऑर्डर्स पर रोक को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताते हुए कहा कि भारत को डायबिटीज कैपिटल बनने से रोकने के लिए सभी चिकित्सा पद्धतियों के बीच समन्वय जरूरी है। उन्होंने इंटीग्रेटिव मेडिसिन को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का व्यावहारिक मॉडल बताया और कहा कि अलग-अलग पद्धतियों के चिकित्सकों का लक्ष्य अंततः समाज का स्वास्थ्य सुधार ही होना चाहिए।

एविडेंस बेस्ड रिसर्च, CCRH प्लेटफॉर्म और एआई सहयोग

रीजनल रिसर्च इंस्टीट्यूट, सिलिगुड़ी (CCRH) के यूनिट हेड डॉ. रंजीत सोनी ने कहा कि परिषद होम्योपैथी में एविडेंस बेस्ड रिसर्च को तेज गति से आगे बढ़ा रही है। उन्होंने बताया कि CCRH के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर देश का कोई भी चिकित्सक सफल और प्रमाणित केस अपलोड कर सकता है। इससे शोध, सत्यापन और दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया मजबूत होगी। सम्मेलन में यह भी रेखांकित किया गया कि भविष्य में एआई टूल्स डेटा विश्लेषण, केस ट्रैकिंग और क्लीनिकल पैटर्न पहचान में सहयोगी हो सकते हैं, जिससे शोध आधारित निर्णय क्षमता बढ़ेगी।

कॉन्फ्रेंस सेक्रेटरी डॉ. विकास सिंघल, चंडीगढ़ ने कहा कि पहले होम्योपैथी को अक्सर सर्दी-जुकाम तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब कैंसर के सहायक उपचार, बोन मैरो विकार, अप्लास्टिक एनीमिया, क्रॉनिक ऑस्टियोमायलाइटिस, बांझपन, त्वचा रोग, बाल झड़ना, एडीएचडी और ऑटिज्म जैसे जटिल मामलों में भी सकारात्मक परिणामों पर काम सामने आया है।

मानसिक स्वास्थ्य, समग्र उपचार और क्लीनिकल अनुभव

कोकीलाबेन धीरुभाई अंबानी हॉस्पिटल, इंदौर के विभागाध्यक्ष डॉ. वैभव चतुर्वेदी ने मानसिक रोगों में होलिस्टिक अप्रोच की उपयोगिता पर प्रस्तुति दी। उनके अनुसार जब उपचार योजना में शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक सभी आयामों को शामिल किया जाता है, तो सुधार अपेक्षाकृत तेज और टिकाऊ हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मामलों में इस दृष्टिकोण से दीर्घकालिक दवा-निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

वैज्ञानिक सत्रों में कई चिकित्सकों ने अपने-अपने विषयों पर अध्ययन और केस रिपोर्ट रखीं। डॉ. जयेश पटेल ने हेयर डिफ्लुवियम में होम्योपैथी की भूमिका, डॉ. शिबांशु शेखर आचार्य ने तीव्र आपात स्थितियों के प्रबंधन, डॉ. सुखजीत कौर बठला ने महिलाओं के लिए समग्र चिकित्सा, डॉ. अर्पित चोपड़ा जैन ने ऑन्कोलॉजी में प्री और पोस्ट होम्योपैथिक उपचार, डॉ. विकास सिंघल ने क्रॉनिक ऑस्टियोमायलाइटिस केस, डॉ. नवनीत शर्मा ने जटिल यूरोथेलियल कार्सिनोमा, और डॉ. रंजीत सोनी ने यूरोलिथियासिस में बेरबेरिस वल्गारिस की भूमिका पर विचार रखे।

इसी क्रम में डॉ. शिवा सिंह पंडित ने ऑटोइम्यून त्वचा रोग, डॉ. संगीता पनेरी ने ऑस्टियोपोरोसिस के बायोकेमिकल पहलू, डॉ. वैभव चतुर्वेदी ने एंग्जायटी डिसऑर्डर के फार्माकोलॉजिकल और नॉन-फार्माकोलॉजिकल आयाम, डॉ. विभा सेठ ने पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी, डॉ. ज्योति संदीप कालंत्री ने वल्वल पेन सिंड्रोम, डॉ. ए.के. द्विवेदी ने अप्लास्टिक एनीमिया, डॉ. पुष्कर महाजन ने जनरलाइज्ड एंग्जायटी डिसऑर्डर पर सिस्टेमैटिक रिव्यू, डॉ. समीर चौक्कर ने ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर, डॉ. विभा मेवाड़ा शर्मा ने त्वचा और ट्राइकोलॉजिकल समस्याओं की एविडेंस बेस्ड केस रिपोर्ट, डॉ. शिवानी पारिख ने पीसीओएस पर क्लीनिकल अध्ययन, डॉ. संदीप मोहंती ने होम्योपैथी की संभावनाएं, डॉ. अनुष्का गावड़े ने पीसीओएस और मासिक धर्म विकारों का इंटीग्रेटिव मॉडल, डॉ. कमलेश कडके ने एडीएचडी सहित ऑटिज्म केस स्टडी, डॉ. विजय सिंह यादव ने कैंसर में पूरक दृष्टिकोण, डॉ. हेमंत खैरनार ने डर्मेटोलॉजी के सफल केस, डॉ. शेफाली राठौड़ ने जटिल सिस्टाइटिस और डॉ. वैभव जैन ने एग्रोहोम्योपैथी के सतत कृषि मॉडल पर शोध प्रस्तुत किया।

संस्थागत सहयोग और आयोजन ढांचा

यह एक दिवसीय सम्मेलन ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर, इंदौर में आयोजित हुआ। सांसद सेवा प्रकल्प, इंदौर और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) के इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (IMS) ने संयुक्त रूप से आयोजन का संचालन किया। सहयोगी संस्थानों में आयुष मेडिकल वेलफेयर फाउंडेशन, एडवांस्ड होम्योपैथिक सोसाइटी सेहत एवं सूरत, और होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की मध्यप्रदेश इकाई शामिल रही। आयोजकों के मुताबिक, सम्मेलन ने शहर में होम्योपैथी चिकित्सा, शोध और शिक्षा के लिए एक विस्तृत नेटवर्क तैयार करने की शुरुआत की है, जिसमें क्लीनिकल अनुभव, डेटा आधारित अध्ययन और अंतर्विषयी सहयोग को आगे बढ़ाया जाएगा।