मध्य प्रदेश सरकार ने इंदौर हाईकोर्ट बेंच में नियुक्त विधि अधिकारियों के पदों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। राज्य शासन ने इंदौर के दोनों अतिरिक्त महाधिवक्ताओं (Additional Advocate General – AAG) को बदल दिया है। इस प्रशासनिक फेरबदल को लेकर वकीलों और न्यायिक हलकों में काफी चर्चा है।
नई नियुक्तियों के अनुसार, अब इंदौर बेंच में सरकार का पक्ष रखने की जिम्मेदारी नए चेहरों को सौंपी गई है। शासन ने पुराने दोनों एएजी की जगह नए अधिवक्ताओं को यह महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा है। यह बदलाव सरकार की कानूनी टीम को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
उप महाधिवक्ताओं की कुर्सी सुरक्षित
जहां एक तरफ एएजी स्तर पर बड़ा बदलाव देखने को मिला है, वहीं उप महाधिवक्ता (Deputy Advocate General) के पदों पर कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। इंदौर बेंच में पदस्थ दोनों डिप्टी एजी अपने पदों पर बने रहेंगे। शासन ने फिलहाल उनकी कार्यशैली पर भरोसा जताते हुए उन्हें सेवा विस्तार दिया है।
प्रशासनिक और कानूनी रणनीति का हिस्सा
सूत्रों के मुताबिक, यह बदलाव सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। अक्सर नई सरकार या प्रशासन अपनी कानूनी टीम में अपनी पसंद और विश्वासपात्र वकीलों को जगह देता है ताकि कोर्ट में सरकार का पक्ष मजबूती से रखा जा सके। इंदौर हाईकोर्ट बेंच, जो कि व्यावसायिक राजधानी के मामलों की सुनवाई करती है, वहां एएजी का पद अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
विधि विभाग का आदेश
विधि और विधायी कार्य विभाग द्वारा जारी आदेश में नए नामों की घोषणा की गई है। पुराने एएजी को तत्काल प्रभाव से हटाकर नए नियुक्त किए गए अधिकारियों को पदभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। डिप्टी एजी के मामले में यथास्थिति बनाए रखने का निर्णय लिया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि सरकार उनके प्रदर्शन से संतुष्ट है।
इस फेरबदल के बाद अब इंदौर हाईकोर्ट में सरकारी मुकदमों की पैरवी का जिम्मा नई टीम के कंधों पर होगा। कानूनी जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में कुछ और बदलाव भी देखने को मिल सकते हैं, लेकिन फिलहाल फोकस एएजी स्तर के अधिकारियों पर ही रहा है।