Indore कृषि महाविद्यालय में उबाल: डीन डॉ. भरत सिंह के खिलाफ छात्रों का संघर्ष दसवें दिन भी जारी

इंदौर कृषि महाविद्यालय में पिछले दस दिनों से छात्रों और शिक्षकों का आंदोलन जारी है। यह प्रदर्शन महाविद्यालय के प्रभारी अधिष्ठाता (डीन) डॉ. भरत सिंह के खिलाफ हो रहे प्रशासनिक अनियमितताओं और दमनकारी नीतियों के विरोध में चल रहा है। छात्रों का आरोप है कि डॉ. भरत सिंह न केवल मनमाने तरीके से प्रशासन चला रहे हैं, बल्कि महिला प्रोफेसरों और छात्राओं के प्रति भी अमर्यादित व्यवहार कर रहे हैं।

क्यों गुस्से में हैं छात्र?

महाविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों का कहना है कि डॉ. भरत सिंह को विश्वविद्यालय के नियमों के खिलाफ जाकर प्रभारी अधिष्ठाता पद पर नियुक्त किया गया है। राजमाता विजयराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार, किसी अधिष्ठाता पर जांच शुरू होते ही उसे पद से हटा दिया जाना चाहिए। कृषि मंत्री द्वारा जांच के आदेश दिए जाने के बावजूद, डॉ. भरत सिंह अब तक पद पर बने हुए हैं। इससे छात्र और शिक्षक आक्रोशित हैं और निष्पक्ष जांच तथा डीन को हटाने की मांग कर रहे हैं।

छात्रों के साथ भेदभाव और धमकियां

छात्रों का आरोप है कि डीन द्वारा आंदोलनरत छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की धमकी दी जा रही है। कुछ छात्रों को नोटिस भेजे गए हैं, जिससे उनमें डर का माहौल बना हुआ है। इसके अलावा, कुछ छात्रों को कॉलेज से निष्कासित करने की चेतावनी दी गई है। यह प्रशासनिक दमन न केवल छात्रों की आवाज को दबाने की कोशिश है, बल्कि उनकी शिक्षा के भविष्य को भी अंधकार में धकेलने जैसा है।

महिला प्रोफेसरों और छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार

छात्राओं और महिला प्रोफेसरों ने भी डीन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, डीन का व्यवहार अनुचित और भयावह है। कई छात्राओं ने बताया कि उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है और असहज महसूस कराया जा रहा है। महिला प्रोफेसरों ने भी उनके रवैये पर आपत्ति जताई है और विश्वविद्यालय प्रशासन से तुरंत कार्रवाई करने की मांग की है।

कैंडल मार्च और ज्ञापन सौंपने की कार्रवाई

आंदोलन के नौवें दिन, छात्रों ने गांधीजी की प्रतिमा (रीगल चौराहा) तक कैंडल मार्च निकाला। इस मार्च में छात्राओं ने अपनी पीड़ा व्यक्त की और विश्वविद्यालय प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई। छात्राओं ने बापू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कुलपति और शासन से न्याय की प्रार्थना की।

इसके अलावा, इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें डीन की बर्खास्तगी और निष्पक्ष जांच की मांग की गई।

प्रोफेसर्स भी आए समर्थन में

सिर्फ छात्र ही नहीं, बल्कि महाविद्यालय के कई प्रोफेसरों ने भी डीन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना है कि डॉ. भरत सिंह का प्रशासनिक रवैया पूरी तरह से तानाशाही भरा है। उन्होंने संकाय सदस्यों और शिक्षकों के साथ भी अभद्रता की है। कई प्रोफेसर डीन के खिलाफ खुलकर बोलने से डर रहे हैं क्योंकि उन्हें भी प्रताड़ना का सामना करना पड़ सकता है।

क्या कह रहा है प्रशासन?

राजमाता विजयराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर के कुलपति अब तक इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। छात्रों और शिक्षकों का आरोप है कि कुलपति इस पूरे मामले में निष्क्रिय बने हुए हैं और डीन को संरक्षण दे रहे हैं। उनका कहना है कि यदि कुलपति समय रहते उचित कार्रवाई नहीं करते, तो यह आंदोलन और अधिक उग्र हो सकता है।

आगे क्या होगा?

छात्रों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं की जातीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। यदि प्रशासन जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाता, तो छात्रों ने राज्यपाल और उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की भी चेतावनी दी है।

सरकार को मामले में तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए :

इंदौर कृषि महाविद्यालय में हो रहे इस आंदोलन ने शिक्षा जगत को हिला कर रख दिया है। जहां एक तरफ छात्र और शिक्षक न्याय की गुहार लगा रहे हैं, वहीं प्रशासन की चुप्पी संदेह पैदा कर रही है। सवाल यह उठता है कि क्या शिक्षा संस्थानों में मनमानी करने वालों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई होगी, या फिर छात्रों और शिक्षकों को यूं ही अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ेगा?