इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी का कहर, 80 वर्षीय बुजुर्ग की मौत के साथ आंकड़ा 33 पहुंचा

इंदौर: शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी की समस्या एक बार फिर जानलेवा साबित हुई है। गुरुवार सुबह, कई दिनों से बीमार चल रहे 80 वर्षीय शांतिलाल ने एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस मौत के साथ ही क्षेत्र में दूषित पानी के कारण जान गंवाने वालों का आंकड़ा 33 तक पहुंच गया है। इस घटना ने नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

भागीरथपुरा क्षेत्र पिछले कई महीनों से गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। यहां के निवासियों का आरोप है कि नगर निगम द्वारा सप्लाई किए जा रहे पानी में गंदगी और बैक्टीरिया हैं, जिसके कारण लोग लगातार बीमार पड़ रहे हैं। डायरिया, उल्टी-दस्त और अन्य जल-जनित बीमारियों के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।

प्रशासनिक दावों के बावजूद नहीं थम रहा मौतों का सिलसिला

मामले की जानकारी मिलने पर स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम के अधिकारी सक्रिय हो गए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. बी.एस. सेतिया ने मौत की पुष्टि की है। हालांकि, उन्होंने कहा कि मौत का सटीक कारण मेडिकल रिपोर्ट की समीक्षा के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। उन्होंने बताया कि विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

इससे पहले भी शिकायतों के बाद नगर निगम ने पानी के सैंपल लिए थे, जिनकी जांच में बैक्टीरिया की पुष्टि हुई थी। इसके बाद निगम ने पानी की टंकियों की सफाई और कुछ इलाकों में नई पाइपलाइन बिछाने जैसे कदम उठाने का दावा किया था, लेकिन मौतों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है।

निवासियों में भारी गुस्सा, लापरवाही का आरोप

क्षेत्र में 33वीं मौत के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। उनका कहना है कि वे कई बार प्रशासन से स्वच्छ पानी की आपूर्ति के लिए गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। रहवासियों ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी जान की कोई कीमत नहीं समझी जा रही है।

लोगों का आरोप है कि अधिकारी केवल खानापूर्ति कर रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। इस गंभीर समस्या के कारण पूरा इलाका डर के साये में जी रहा है और एक स्थायी व ठोस समाधान की मांग कर रहा है।