इंदौर में सीवेज मिला पानी बना जानलेवा, 15वीं मौत के बाद NHRC और हाईकोर्ट एक्टिव

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से होने वाली मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा जानकारी के अनुसार, इस त्रासदी में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 15 हो गई है। स्थानीय निवासियों में प्रशासन के खिलाफ गहरा रोष है और वे लगातार कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

शुरुआती दौर में मौतों को सामान्य बीमारी या अन्य कारणों से जोड़ा जा रहा था, लेकिन अब स्थिति स्पष्ट हो गई है। प्रयोगशाला से आई जांच रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि क्षेत्र में आपूर्ति किया जा रहा पानी पीने योग्य नहीं था और यह गंभीर रूप से दूषित था।

लैब रिपोर्ट ने खोली पोल

स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम द्वारा भेजे गए पानी के नमूनों की जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। इस रिपोर्ट में पानी में हानिकारक बैक्टीरिया और अशुद्धियों की पुष्टि हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीवेज लाइन और पेयजल लाइन के आपस में मिलने के कारण यह संक्रमण फैला है। प्रशासन ने अब जाकर लीकेज ढूंढने और मरम्मत का काम तेज किया है।

प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने कई बार गंदे पानी की शिकायत नगर निगम के जोन कार्यालय में की थी, लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। यदि शिकायतों पर पहले ही ध्यान दिया जाता, तो शायद इतनी बड़ी जनहानि को रोका जा सकता था। अब तक 15 लोगों की जान जाना एक गंभीर प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा करता है।

अस्पतालों में मरीजों की भीड़

दूषित पानी के सेवन से बीमार हुए कई लोग अभी भी शहर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत लेकर मरीज लगातार अस्पतालों पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने क्षेत्र में मेडिकल कैंप लगाकर लोगों की जांच शुरू कर दी है और घर-घर जाकर सर्वे किया जा रहा है ताकि बीमार लोगों की पहचान की जा सके।

पुराना संदर्भ

गौरतलब है कि इससे पहले भी इंदौर के ही कुछ अन्य इलाकों में गंदे पानी की समस्या सामने आई थी, लेकिन भागीरथपुरा की घटना ने अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। कुछ दिन पहले ही मौतों का आंकड़ा कम था, लेकिन अचानक इसमें हुई वृद्धि ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया है।

जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग

विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। उनकी मांग है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। फिलहाल, प्रशासन का पूरा जोर स्थिति को नियंत्रित करने और साफ पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर है।