इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से बच्चों की मौत के बाद जागी निगम, 311 एप पर शिकायतों की भरमार

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई दो बच्चों की मौत के मामले ने शहर में हड़कंप मचा दिया है। इस दुखद घटना के बाद स्थानीय रहवासियों और नगर निगम प्रशासन के बीच तनाव और सक्रियता दोनों बढ़ गए हैं। घटना के बाद से ही क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश है और उन्होंने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

नगर निगम के 311 एप पर शिकायतों का आंकड़ा अचानक बढ़ गया है। भागीरथपुरा और आसपास के इलाकों से लोग लगातार गंदे पानी की आपूर्ति और ड्रेनेज लाइन चोक होने की शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में ही सैकड़ों शिकायतें इस एप पर पहुंची हैं, जो निगम की व्यवस्थाओं की पोल खोल रही हैं।

निगम की कार्रवाई और जांच

दो मासूमों की जान जाने के बाद नगर निगम का अमला अब जाकर सक्रिय हुआ है। निगम के अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया और पानी के सैंपल लिए हैं। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि पानी की पाइपलाइन और ड्रेनेज लाइन पास-पास होने के कारण लीकेज की वजह से पानी दूषित हो रहा था। अधिकारियों ने ड्रेनेज लाइनों की सफाई और मरम्मत का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि वे लंबे समय से गंदे पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। अगर समय रहते कार्रवाई की जाती, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। निगम ने अब क्षेत्र में टैंकरों के माध्यम से साफ पानी की आपूर्ति शुरू कर दी है और स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी घर-घर जाकर लोगों के स्वास्थ्य की जांच कर रही हैं।

पुरानी शिकायतों की अनदेखी पड़ी भारी

यह घटना इस बात का प्रमाण है कि नागरिक शिकायतों की अनदेखी कितनी घातक हो सकती है। 311 एप पर पहले भी इस क्षेत्र से शिकायतें आती रही हैं, लेकिन उनका स्थायी समाधान नहीं किया गया। अब जब पानी सिर से ऊपर चला गया है, तो प्रशासन लीपापोती में जुटा है। रहवासियों ने मांग की है कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और पूरे शहर की पाइपलाइनों की जांच की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

स्वास्थ्य विभाग की सतर्कता

दूषित पानी के कारण फैलने वाली बीमारियों की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने भी अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। क्षेत्र में उल्टी-दस्त और पेट दर्द के मरीजों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। मेडिकल टीमें प्रभावित परिवारों को दवाइयां वितरित कर रही हैं और उन्हें पानी उबालकर पीने की सलाह दी जा रही है। जिला प्रशासन ने भी मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की बात कही है।