16 मौतों वाले भागीरथपुरा से भाजपा की जीत, कांग्रेस की रणनीति हुई फेल

मध्य प्रदेश के इंदौर में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया है। विशेष रूप से भागीरथपुरा क्षेत्र के परिणाम चर्चा का विषय बने हुए हैं। यह वही इलाका है, जहां कुछ समय पहले जहरीली शराब पीने से 16 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस घटना को कांग्रेस ने एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया था, लेकिन चुनाव परिणामों ने एक अलग ही कहानी बयां की है।

भागीरथपुरा, जो इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-2 के अंतर्गत आता है, भाजपा का गढ़ माना जाता है। जहरीली शराब कांड के बाद कांग्रेस को उम्मीद थी कि वह इस त्रासदी के सहारे भाजपा के इस किले में सेंध लगाने में कामयाब होगी। कांग्रेस नेताओं ने सड़क से लेकर सदन तक इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था। उन्होंने प्रशासन और सरकार की लापरवाही को लेकर कई प्रदर्शन भी किए थे।

त्रासदी के बावजूद भाजपा को मिला समर्थन

आंकड़े बताते हैं कि भागीरथपुरा के लोगों ने एक बार फिर भाजपा पर ही भरोसा जताया है। इस क्षेत्र के मतदान केंद्रों से भाजपा प्रत्याशी रमेश मेंदोला को भारी मत मिले हैं। मेंदोला ने न केवल अपनी सीट बचाई, बल्कि प्रदेश में सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। भागीरथपुरा के वार्डों में भाजपा को मिली बढ़त यह साबित करती है कि जहरीली शराब कांड का चुनावी नतीजों पर कोई खास असर नहीं हुआ।

कांग्रेस की रणनीति पर सवाल

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस केवल मुद्दों को उठाने तक ही सीमित रही, लेकिन वह जनता के बीच विश्वास पैदा करने में विफल रही। स्थानीय लोगों का मानना है कि भाजपा संगठन की जमीनी पकड़ और लगातार संपर्क ने इस नकारात्मक माहौल को भी अपने पक्ष में कर लिया। कांग्रेस प्रत्याशी चिंटू चौकसे ने काफी प्रयास किए, लेकिन वे रमेश मेंदोला के तिलिस्म को तोड़ने में नाकाम रहे।

घटना की पृष्ठभूमि

ज्ञात हो कि भागीरथपुरा में अवैध शराब का कारोबार लंबे समय से फल-फूल रहा था। इसी दौरान जहरीली शराब पीने से कई परिवारों के चिराग बुझ गए थे। प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए कुछ आरोपियों को गिरफ्तार भी किया था और अवैध शराब के अड्डों को ध्वस्त किया था। उस समय का माहौल भाजपा के खिलाफ नजर आ रहा था, लेकिन चुनाव आते-आते यह गुस्सा वोटों में तब्दील नहीं हो सका।

संगठन की ताकत और लाडली बहना योजना

जानकारों के अनुसार, भाजपा की जीत के पीछे केवल स्थानीय समीकरण ही नहीं, बल्कि ‘लाडली बहना योजना’ जैसी सरकारी योजनाओं का भी बड़ा हाथ रहा। भागीरथपुरा जैसी बस्तियों में इस योजना का व्यापक असर देखने को मिला। महिलाओं ने बड़ी संख्या में भाजपा के पक्ष में मतदान किया, जिससे कांग्रेस का पूरा गणित बिगड़ गया। यह परिणाम कांग्रेस के लिए एक सबक है कि केवल भावनात्मक मुद्दों के सहारे चुनाव नहीं जीते जा सकते।