मध्य प्रदेश के आर्थिक केंद्र इंदौर में भागीरथपुरा त्रासदी को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने पीड़ित परिवारों के साथ राजबाड़ा पर धरना प्रदर्शन किया। पार्टी ने मृतकों के परिजनों को 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और नगर निगम में नौकरी देने की मांग की।
देश के सबसे स्वच्छ शहर में त्रासदी
इंदौर को लगातार कई बार देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया गया है। लेकिन भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी की आपूर्ति ने इस छवि को धक्का पहुंचाया। इस इलाके में उल्टी-दस्त की बीमारी फैलने से 32 लोगों की जान चली गई।
दूषित पानी पीने से सैकड़ों लोग बीमार पड़ गए थे। कई परिवारों के एक से अधिक सदस्य इस त्रासदी की चपेट में आए। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन की लापरवाही को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया।
कांग्रेस का राजबाड़ा पर धरना
कांग्रेस ने पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए राजबाड़ा पर धरना प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में उन 32 परिवारों के सदस्य भी शामिल हुए जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से जवाबदेही की मांग की। उन्होंने कहा कि स्वच्छ शहर का दावा करने वाले इंदौर में ऐसी घटना शर्मनाक है।
प्रमुख मांगें
कांग्रेस ने पीड़ित परिवारों के लिए कई मांगें रखी हैं। पार्टी ने मांग की कि प्रत्येक मृतक के परिवार को 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए।
इसके अलावा पार्टी ने मांग की कि पीड़ित परिवारों के एक सदस्य को नगर निगम में नौकरी दी जाए। कांग्रेस का कहना है कि इससे परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।
प्रशासन पर उठे सवाल
इस त्रासदी के बाद नगर निगम और जल विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं। विपक्ष ने पूछा कि आखिर पानी की आपूर्ति में इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच नहीं हो रही थी। उन्होंने मांग की कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
पीड़ित परिवारों की व्यथा
धरने में शामिल परिवारों ने अपना दर्द बयां किया। कई परिवारों में कमाने वाले सदस्य की मृत्यु हो गई। अब ये परिवार आर्थिक संकट में हैं।
कुछ परिवारों में बुजुर्ग और बच्चे इस बीमारी की चपेट में आए। उनके इलाज में भी काफी खर्च हुआ। परिवारों ने सरकार से मदद की गुहार लगाई।
स्वच्छता अभियान पर सवाल
इंदौर ने स्वच्छ भारत अभियान में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। शहर को कई बार सबसे स्वच्छ शहर का खिताब मिला है। लेकिन भागीरथपुरा की घटना ने इस उपलब्धि पर सवाल खड़े कर दिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्वच्छता का मतलब सिर्फ सड़कों की सफाई नहीं है। पीने के पानी की शुद्धता भी इसका अहम हिस्सा है।
आगे की राह
कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन तेज किया जाएगा। पार्टी ने कहा कि वह पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है।
प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। देखना होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है।
भागीरथपुरा त्रासदी ने शहरी प्रशासन की खामियों को उजागर किया है। अब जरूरी है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।