Indore News : भारत सरकार की महत्वाकांक्षी मेट्रो रेल परियोजना मध्य प्रदेश में मुश्किलों का सामना कर रही है। इंदौर और भोपाल दोनों शहरों में मेट्रो को यात्रियों का अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पा रहा है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कंपनी को कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ी है।
जानकारी के अनुसार मेट्रो कंपनी ने इंदौर से 9 और भोपाल से 6 कर्मचारियों को नोटिस देकर सेवा से हटा दिया है। कुल 15 कर्मचारियों की छंटनी की पुष्टि कंपनी के एक अधिकारी ने भी की है। हालांकि अधिकारी ने स्पष्ट नहीं किया कि यह कदम घाटे के कारण उठाया गया है या नहीं।
इंदौर में मेट्रो का संचालन ठप
इंदौर में मेट्रो का कमर्शियल रन धूमधाम से शुरू हुआ था। पहले सप्ताह जब निशुल्क सेवा दी गई तो जबरदस्त उत्साह देखा गया। लेकिन टिकट व्यवस्था शुरू होते ही यात्री गायब हो गए। खर्चा बढ़ता गया और आमदनी न के बराबर रह गई।
वर्तमान में इंदौर मेट्रो का संचालन पिछले कुछ दिनों से पूरी तरह बंद है। कंपनी अब दूसरे चरण यानी 17 किलोमीटर के कमर्शियल रन की तैयारी में लगी है।
भोपाल में भी हालात चिंताजनक
भोपाल मेट्रो की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। शुरुआती दिनों में अच्छी भीड़ देखी गई थी। लेकिन धीरे-धीरे यात्रियों की संख्या इतनी घट गई कि कंपनी को मेट्रो की टाइमिंग बदलनी पड़ी।
विशेषज्ञों का मानना है कि मेट्रो को सही पटरी पर लाने के लिए कंपनी को सीधे यात्रियों से जुड़ना होगा। उनकी जरूरतों को समझना होगा।
कांग्रेस का करारा तंज
मेट्रो की इस स्थिति पर प्रदेश कांग्रेस ने तीखे हमले किए हैं। इंदौर और भोपाल दोनों जगह कांग्रेस नेताओं ने सरकार को घेरा है।
इंदौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि इंदौर मेट्रो आने वाले समय में दूसरा बीआरटीएस साबित होगी।
“इस समय शहर को मेट्रो रेल की आवश्यकता नहीं है। इस पर खर्च किए जा रहे 12000 करोड़ रुपए से 600 से ज्यादा फ्लाईओवर और पुल बनाए जा सकते थे।” — चिंटू चौकसे
भोपाल कांग्रेस ने बताया खराब प्लानिंग
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय सचिव और पूर्व विधायक कुणाल चौधरी ने मेट्रो पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने मेट्रो की प्लानिंग पर सवाल उठाए।
“भोपाल में एक किलोमीटर में तीन-तीन स्टेशन बना दिए। मेट्रो को रेलगाड़ी नहीं बैलगाड़ी की तरह बनाया गया।” — कुणाल चौधरी