इंदौर में ‘वंदे मातरम्’ पर सियासी घमासान: BJP नेताओं के तल्ख तेवर, कोर्ट पहुंचा मामला

Indore News: इंदौर में नगर निगम बजट सत्र के दौरान शुरू हुआ ‘वंदे मातरम्’ विवाद अब एक बड़े राजनीतिक और कानूनी संग्राम का रूप ले चुका है। भारतीय जनता पार्टी के कई दिग्गज नेताओं ने इस मुद्दे पर बेहद कड़े तेवर अपनाते हुए दो टूक कहा है कि देश में रहना है तो राष्ट्रगीत गाना ही होगा। इस विवाद की गूंज अब गलियारों से निकलकर अदालत तक जा पहुंची है।

विधायक मालिनी गौड़ का बड़ा एलान: “नहीं चाहिए ऐसे वोट”

क्षेत्र क्रमांक-4 से बीजेपी विधायक मालिनी गौड़ ने इस विवाद को नई दिशा देते हुए स्पष्ट किया कि वह राष्ट्रवाद के मुद्दे पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेंगी। मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने दिवंगत नेता लखन दादा की विचारधारा का हवाला देते हुए कहा कि-

“जो लोग ‘वंदे मातरम्’ और ‘भारत माता की जय’ बोलने से परहेज करते हैं, मुझे उनके वोट की आवश्यकता नहीं है। मैं ऐसे क्षेत्रों में चुनाव प्रचार करने भी नहीं जाती जहाँ राष्ट्र के प्रति सम्मान न हो।”

गौड़ ने आगे कहा कि यह विषय सीधे तौर पर देशभक्ति से जुड़ा है और भारत में रहने वाले हर नागरिक को इन नारों का सम्मान करना चाहिए।

आकाश विजयवर्गीय और ऊषा ठाकुर के तीखे हमले

पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए विपक्षी पार्षदों और विरोध करने वालों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् पर आपत्ति लेने वाले लोग अवसर मिलने पर देश को बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने ऐसे लोगों की तुलना ‘राष्ट्रद्रोहियों’ से करते हुए कहा कि यह पीएम मोदी और आरएसएस के मूल्यों वाली सरकार है, जहाँ राष्ट्र सर्वोपरि है।

वहीं, पूर्व मंत्री और विधायक ऊषा ठाकुर ने अपने चिर-परिचित अंदाज में कहा कि भारत एक संवैधानिक और स्वतंत्र राष्ट्र है, यह कोई इस्लामिक देश नहीं है। उन्होंने कहा:

  • राष्ट्र ही शरणदाता: “जिस धरती की गोद में आपको समाहित (दफन) होने की अनुमति मिली है, उसी की प्रार्थना से परहेज करना राष्ट्रद्रोहिता है।”

  • सीधी चेतावनी: उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ‘वंदे मातरम्’ गाना होगा, अन्यथा देश से जाना होगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अल्पसंख्यक वर्ग भारत में सबसे अधिक सुरक्षित है और सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहा है, फिर भी राष्ट्रगीत का विरोध समझ से परे है।

कोर्ट की दहलीज पर पहुंचा विवाद

नेताओं के बयानों और पार्षदों के विरोध के बीच यह मामला अब कानूनी रूप ले चुका है। सामाजिक कार्यकर्ता विकास अवस्थी ने अधिवक्ता आकाश शर्मा के माध्यम से जिला अदालत में एक परिवाद दायर किया है।

परिवाद के मुख्य बिंदु:

  1. पार्षदों द्वारा मीडिया में यह कहना कि “इस्लाम में वंदे मातरम् प्रतिबंधित है”, सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने वाला कृत्य है।

  2. सार्वजनिक मंचों पर राष्ट्रगीत का अपमान करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग।

  3. शहर की शांति व्यवस्था भंग होने की आशंका जताई गई है।

निष्कर्ष

इंदौर नगर निगम से शुरू हुई यह चिंगारी अब पूरे प्रदेश की राजनीति को गरमा रही है। जहाँ एक ओर बीजेपी इसे राष्ट्रवाद की कसौटी बता रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी खेमे में इस पर तीखी प्रतिक्रिया होने की संभावना है। फिलहाल, शहर में इस मुद्दे को लेकर तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और सबकी नजरें अब अदालत के रुख पर टिकी हैं।