एमपी में 7400 करोड़ की नई रेल परियोजना को हरी झंडी, कई गांवों से होकर गुजरेगी लाइन, 35 प्रजातियों के पेड़ों की होगी कटाई

मध्य प्रदेश में इंदौर-बुदनी रेल लाइन परियोजना को जमीन स्तर पर आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम प्रशासनिक मंजूरी मिल गई है। जिला प्रशासन ने सरकारी जमीन पर आने वाले पेड़ों की कटाई के लिए रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) को सशर्त अनुमति दी है। यह अनुमति आरवीएनएल, भोपाल के मुख्य परियोजना प्रबंधक के आवेदन पर जारी की गई है।

प्रशासनिक रिकॉर्ड के मुताबिक इस हिस्से में 35 प्रजातियों के 277 पेड़ प्रभावित होंगे। संबंधित क्षेत्र में वन विभाग की भूमि शामिल नहीं है, इसलिए प्रक्रिया सरकारी राजस्व भूमि से जुड़े नियमों के तहत पूरी की जा रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कटाई से पहले जहां संभव होगा, वहां पेड़ों के ट्रांसप्लांटेशन का प्रयास किया जाएगा।

इंदौर-बुदनी रेल लाइन का यह चरण डकाच्या और सांवेर इलाके के गांवों से गुजरता है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पहले से चल रही है और पेड़ हटाने की अनुमति को निर्माण कार्य की तैयारी का अगला कदम माना जा रहा है। प्रशासन ने कटाई के साथ पुनर्वनीकरण और निगरानी से जुड़े निर्देश भी जोड़े हैं।

किन गांवों से गुजरेगा रेल ट्रैक

योजना के अनुसार रेल लाइन डकाच्या, कदवाली बुजुर्ग, कदवाली खेर्द, बीसाखेडी, लसूड़िया परमार और मेलकलमा सहित अन्य गांवों के आसपास से निकलेगी। स्थानीय स्तर पर चिन्हांकन के दौरान जिन पेड़ों को हटाना आवश्यक बताया गया है, उनकी संख्या 277 से अधिक बताई गई है। रेल प्रबंधन का कहना है कि अंतिम कार्यवाही तकनीकी सर्वे और साइट स्थिति के अनुसार की जाएगी।

जिला प्रशासन ने अनुमति देते समय यह भी कहा है कि पर्यावरणीय संतुलन के लिए अनिवार्य प्रतिपूरक पौधरोपण किया जाए। इसके तहत जितने पेड़ हटेंगे, उनसे तीन गुना अधिक नए पौधे रेलवे लाइन के दोनों ओर लगाए जाने का प्रावधान रखा गया है। इस मॉडल को परियोजना के अन्य हिस्सों में भी लागू करने की बात कही गई है।

कटाई से पहले ट्रांसप्लांट की प्राथमिकता

रेलवे अधिकारियों के अनुसार प्राथमिक रणनीति पेड़ों को सीधे काटने की नहीं, बल्कि पहले ट्रांसप्लांट करने की है। जो पेड़ तकनीकी कारणों से स्थानांतरित नहीं किए जा सकेंगे, केवल उन्हें ही हटाया जाएगा। इससे एक ओर निर्माण में देरी कम होगी और दूसरी ओर पर्यावरणीय असर को सीमित रखने का प्रयास किया जाएगा।

प्रशासनिक स्तर पर यह भी तय किया गया है कि कटाई और पौधरोपण की कार्रवाई अलग-अलग एजेंसियों की रिपोर्टिंग के बजाय समन्वित तरीके से दर्ज की जाए। इससे परियोजना की प्रगति और प्रतिपूरक हरियाली की स्थिति की निगरानी एक साथ हो सकेगी।

7,400 करोड़ की परियोजना का दायरा

इंदौर-बुदनी रेलवे लाइन की लंबाई लगभग 205.5 किलोमीटर है। यह 342 किलोमीटर लंबे इंदौर-जबलपुर रेल लाइन प्रोजेक्ट का हिस्सा है। पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 7,400 करोड़ रुपये है। निर्माण ढांचे में 80 से अधिक बड़े पुल, 90 से अधिक छोटे पुल, कई रोड अंडरपास और ओवरब्रिज, तथा दो बड़ी सुरंगें शामिल हैं।

वित्तीय प्रगति के आंकड़ों के अनुसार मार्च 2024 तक इस परियोजना पर लगभग 948 करोड़ रुपये खर्च हो चुके थे। वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अतिरिक्त 1,107 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं। परियोजना एजेंसियों का आकलन है कि जमीन खरीद और निर्माण से जुड़ी चुनौतियों के कारण पूरा काम 2030 तक पूरा होने की संभावना है।

पिछली परियोजनाओं के बाद अगला चरण

रेलवे से जुड़े अधिकारियों के अनुसार महू-खंडवा रेल प्रोजेक्ट में भूमि और संरचनात्मक कार्यों के अनुभव के बाद अब इंदौर-बुदनी लाइन पर फील्ड गतिविधियां तेज की जा रही हैं। वर्तमान अनुमति को उसी क्रम में एक आवश्यक प्रशासनिक मंजूरी माना जा रहा है। अब फोकस अधिग्रहण, साइट क्लियरेंस और सिविल कार्यों की समयबद्ध प्रगति पर रहेगा।

परियोजना के इस चरण में प्रशासन, रेलवे और कार्यकारी एजेंसियों के बीच समन्वय निर्णायक रहेगा। पेड़ कटाई, ट्रांसप्लांटेशन, प्रतिपूरक पौधरोपण और निर्माण प्रगति—इन सभी बिंदुओं पर समानांतर कार्रवाई के साथ लाइन निर्माण का काम आगे बढ़ाया जाएगा।