दूषित पानी से 28वीं मौत, कांग्रेस वार्ड अध्यक्ष ने तोड़ा दम, दो मरीज वेंटिलेटर पर

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में दूषित पानी का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। शहर में जलजनित बीमारियों और संक्रमण के चलते होने वाली मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा जानकारी के मुताबिक, दूषित पानी के सेवन से बीमार हुए कांग्रेस के एक वार्ड अध्यक्ष की इलाज के दौरान मौत हो गई है। इस घटना के साथ ही शहर में दूषित पानी से होने वाली मौतों की कुल संख्या 28 तक पहुंच गई है।

स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद स्थिति नियंत्रण में आती नहीं दिख रही है। अस्पतालों में अब भी उल्टी-दस्त और पेट दर्द की शिकायत लेकर मरीज पहुंच रहे हैं। कांग्रेस नेता की मौत ने इस मुद्दे को और भी गंभीर बना दिया है, जिससे स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

दो मरीजों की हालत बेहद नाजुक

प्राप्त जानकारी के अनुसार, संक्रमण का असर इतना गहरा है कि कई मरीजों को गहन चिकित्सा इकाई (ICU) में रखना पड़ा है। वर्तमान में दो अन्य मरीजों की हालत बेहद चिंताजनक बनी हुई है और उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। डॉक्टर्स की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है, लेकिन स्थिति गंभीर बताई जा रही है। यह आंकड़ा बताता है कि जमीनी स्तर पर पानी की गुणवत्ता को लेकर अभी भी बड़े सुधार की दरकार है।

प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल

लगातार हो रही मौतों ने नगर निगम और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दूषित जलापूर्ति की शिकायतें शहर के विभिन्न इलाकों से लगातार सामने आ रही हैं। कांग्रेस वार्ड अध्यक्ष की मौत के बाद यह मामला तूल पकड़ सकता है। विपक्षी दलों का आरोप है कि पाइपलाइनों के लीकेज और ड्रेनेज के पानी के मिलने की समस्या को समय रहते ठीक नहीं किया गया, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

लगातार बिगड़ रहे हालात

इंदौर में यह समस्या पिछले कुछ समय से बनी हुई है। इससे पहले भी शहर के अलग-अलग हिस्सों से दूषित पानी पीने से लोगों के बीमार होने और जान गंवाने की खबरें सामने आती रही हैं। 28 मौतों का आंकड़ा यह बताने के लिए काफी है कि स्थिति कितनी भयावह हो चुकी है। स्थानीय नागरिकों में अब नलों से आने वाले पानी को लेकर डर का माहौल है। प्रशासन की ओर से समय-समय पर पानी के सैंपल लेने और जांच करने की बात कही जाती है, लेकिन मौतों का सिलसिला न रुकना इन दावों की पोल खोल रहा है।