इंदौर ने सोलर एनर्जी के क्षेत्र में जनभागीदारी से रच दिया इतिहास

स्वच्छता में नंबर वन बनने के बाद अब इंदौर ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव के नेतृत्व में इंदौर ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में 100 मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता अर्जित कर एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। यह उपलब्धि न केवल शहर के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह सौर ऊर्जा के उपयोग में जनभागीदारी की ताकत को भी साबित करती है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव द्वारा शुरू किया गया सोलर मित्र अभियान अब इंदौर के ऊर्जा क्षेत्र का एक प्रेरणास्त्रोत बन चुका है। इस सफलता के परिणामस्वरूप, इंदौर की कुल ऊर्जा खपत का 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा अब सौर ऊर्जा से प्राप्त हो रहा है।

सौर ऊर्जा में जनभागीदारी का महत्व
सौर ऊर्जा में जनभागीदारी का मतलब है कि शहर के नागरिक, समुदाय और निजी क्षेत्र मिलकर सौर ऊर्जा परियोजनाओं में सक्रिय रूप से हिस्सा लें। चाहे वो सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना हो या इसके उपयोग की पहल, जनभागीदारी ने इसे एक जन आंदोलन का रूप दे दिया है। आज इंदौर के लोग अपनी सौर ऊर्जा प्रणाली की स्थापना कर, इसे अपने जीवन का हिस्सा बना चुके हैं, और यही इस आंदोलन की असली ताकत है।


इंदौर का सौर मित्र अभियान
इंदौर नगर निगम ने सोलर सिटी बनाने के लिए सौर मित्र अभियान की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य शहरवासियों को सोलर सिस्टम लगाने के लिए प्रेरित करना और इससे जुड़ी प्रक्रिया की जानकारी देना है। इस अभियान ने इंदौर को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक मिसाल बना दिया है।
सरकारी योजना में  सौर मित्र अभियान
सौर मित्र अभियान, जिसे सूर्य मित्र कौशल विकास कार्यक्रम भी कहा जाता है, एक ऐसा अद्वितीय कार्यक्रम है, जो युवाओं को सौर ऊर्जा क्षेत्र में प्रशिक्षित करता है। इससे उन्हें ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना, संचालन और रखरखाव में महारत हासिल होती है और साथ ही सौर ऊर्जा क्षेत्र में रोजगार और उद्यमिता के अवसर मिलते हैं।
इस योजना का उद्देश्य है:
सौर ऊर्जा क्षेत्र में कुशल जनशक्ति तैयार करना
युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना
सौर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना, संचालन और रखरखाव में मदद करना
उद्यमिता को बढ़ावा देना

कौशल विकास: इस कार्यक्रम में कक्षा प्रशिक्षण, प्रयोगशाला कार्य, एसपीवी प्लांट का अनुभव, सेवाकालीन प्रशिक्षण (ओजेटी), सॉफ्ट स्किल्स और उद्यमिता कौशल जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर जोर दिया जाता है। प्रत्येक बैच में केवल 30 सीटें उपलब्ध हैं, जिससे इसे और भी चुनौतिपूर्ण और रोमांचक बना दिया जाता है।

पात्रता:
ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले व्यक्तियों, बेरोजगार युवाओं, महिलाओं, एससी/एसटी उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाती है।
आईटीआई/डिप्लोमा (इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सिविल, मैकेनिकल, फिटर, इंस्ट्रूमेंटेशन, वेल्डर) वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाती है।
इस अभियान के माध्यम से इंदौर ना केवल सौर ऊर्जा में अपनी शक्ति को साबित कर रहा है, बल्कि पूरे देश को ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई दिशा भी दिखा रहा है।