नकली कफ सिरप फैक्ट्री का भंडाफोड़, जांच में सैंपल फेल होने पर संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज

इंदौर में आम लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ प्रशासन ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए नकली कफ सिरप बनाने के एक बड़े मामले का खुलासा किया है। प्रशासन को सूचना मिली थी कि शहर के एक इलाके में अवैध रूप से दवाओं का निर्माण किया जा रहा है, जिसके बाद यह छापामार कार्रवाई की गई।

अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर देखा कि वहां कफ सिरप तैयार किया जा रहा था, लेकिन निर्माण की प्रक्रिया संदिग्ध थी। टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए वहां मौजूद स्टॉक को जब्त कर लिया और दवाओं के सैंपल जांच के लिए भेज दिए। अब इन सैंपलों की रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले की गंभीरता सामने आ गई है।

जांच में फेल हुए सैंपल

जब्त किए गए कफ सिरप के नमूनों को जांच के लिए राज्य स्तरीय प्रयोगशाला भेजा गया था। लैब से प्राप्त रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई है कि ये दवाएं गुणवत्ता के मानकों पर खरी नहीं उतरी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कफ सिरप के निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री अमानक (Substandard) पाई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी दवाओं का सेवन मरीजों के लिए फायदे के बजाय नुकसानदेह साबित हो सकता है।

पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

लैब रिपोर्ट में दवाओं के नकली और अमानक पाए जाने के बाद प्रशासन ने कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है। औषधि निरीक्षक द्वारा दी गई लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस ने फैक्ट्री संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस ने औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध किया है।

इस घटना ने शहर में पहले हुई ऐसी ही कार्रवाइयों की याद ताजा कर दी है। गौरतलब है कि इंदौर प्रशासन द्वारा पूर्व में भी मिलावट के खिलाफ विशेष अभियान चलाए गए थे, जिनमें कई अवैध फैक्ट्रियों को सील किया गया था। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दवाओं में मिलावट करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।