Indore का ‘फर्जी नंबर रैकेट’ बेनकाब, सुरक्षा पर बड़ा सवाल

इंदौर में ऑटो डीलरों की मिलीभगत का ऐसा नेटवर्क सामने आया है जिसने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली से लाई गई कारें यहाँ बेधड़क बेची जा रही हैं और हैरानी की बात यह है कि खरीदार के पास दिल्ली का एड्रेस प्रूफ होना भी ज़रूरी नहीं। फिर भी वाहन सीधे दिल्ली नंबर पर खरीदार के नाम दर्ज कर दिया जाता है। दिल्ली में हाल ही में हुए कार ब्लास्ट के बाद इस तरह के कारबार पर सुरक्षा संबंधी आशंकाएँ और गहरी हो गई हैं।

फर्जी एड्रेस से दिल्ली RTO में ट्रांसफर

जांच में सामने आया है कि यह सेटिंग इतनी मजबूत है कि कोई भी व्यक्ति फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दिल्ली RTO में अपने नाम गाड़ी ट्रांसफर करा सकता है। गाड़ी इंदौर में घूमती रहती है, लेकिन उसके मालिक का पता कागजों में दिल्ली का दिखाया जाता है। इससे न सिर्फ पहचान गुम हो जाती है बल्कि किसी वारदात की स्थिति में पुलिस भी असली मालिक तक नहीं पहुँच पाती। ऐसे मामलों में अपराधी आसानी से सिस्टम को चकमा देकर बच सकता है।

अपराधियों के लिए बना ‘सेफ मॉडल’, वास्तविक पता कहीं और

इंदौर में कई वर्षों से यह सेटिंग बिना रोक-टोक चलती आ रही है। वाहनों की खरीद-फरोख्त अब केवल कागजों का खेल बन चुकी है। खरीदार चाहे किसी भी राज्य का क्यों न हो, दिल्ली RTO से वाहन ट्रांसफर का झूठा रिकॉर्ड तैयार कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया में वास्तविक पते का कोई सत्यापन नहीं होता, जिससे अपराधी भी इस सिस्टम का फायदा उठाकर गुमनाम पहचान में वाहनों का उपयोग कर सकते हैं।

बाहरी राज्यों की गाड़ियों पर कोई निगरानी नहीं

एक बड़ा सवाल इंदौर RTO की भूमिका पर उठ रहा है। शहर में दिल्ली, मुंबई, देहरादून समेत कई राज्यों के नंबरों वाली गाड़ियाँ चल रही हैं, मगर इनमें से बड़ी संख्या में गाड़ियों का मूल पता फर्जी है। स्थानीय प्रशासन ने न तो किसी ऐसी गाड़ी की जाँच की और न ही एड्रेस वेरिफिकेशन पर ध्यान दिया। यह लापरवाही सीधा सुरक्षा जोखिम बन चुकी है।

फर्जीवाड़े का तंत्र सबसे बड़ा खतरा

दिल्ली में हुए ब्लास्ट के बाद यह मामला और भी संवेदनशील हो गया है। अब यह साफ हो गया है कि इंदौर में गाड़ियों की खरीद-फरोख्त सिर्फ एक बिजनेस नहीं, बल्कि एक संगठित सेटिंग का हिस्सा है, जो कानून व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। अगर इसी तरह फर्जी नाम पर गाड़ियाँ बिकती रहीं, तो किसी भी बड़ी घटना में ऐसी गाड़ी का इस्तेमाल होना तय है।

फर्जी गाड़ियों का नेटवर्क बढ़ा सकता है बड़ा अपराध

हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, लेकिन यह मामला तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग करता है। फर्जी एड्रेस आधारित वाहन ट्रांसफर का यह मॉडल न केवल कानून का दुरुपयोग है, बल्कि किसी भी दिन बड़े अपराध की वजह बन सकता है। सवाल यह है कि इस नेटवर्क को रोकने के लिए सिस्टम कब जागेगा और जिम्मेदारी किस पर तय होगी।