Indore News : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सख्ती और चेतावनी के बाद इंदौर में सरकारी कार्यालयों की कार्यशैली सुधारने के लिए प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है।
कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर मंगलवार सुबह कलेक्ट्रेट परिसर में औचक निरीक्षण किया गया, जिसमें 80 से ज्यादा कर्मचारी और अधिकारी समय पर दफ्तर में मौजूद नहीं मिले। इस कार्रवाई के बाद कर्मचारियों में हड़कंप मच गया।
संयुक्त कलेक्टर कल्याणी पांडे के नेतृत्व में एक टीम ने सुबह कार्यालय खुलते ही विभिन्न विभागों में छापा मारा। टीम ने मौके पर कर्मचारियों की उपस्थिति जांची और हाजिरी रजिस्टर अपने कब्जे में ले लिए। कई कर्मचारी निर्धारित समय सुबह 10 बजे के बाद भी अपनी सीट पर नहीं पहुंचे थे।
कई बड़े विभागों में मिली लापरवाही
निरीक्षण की यह कार्रवाई कलेक्टर कार्यालय में स्थित महिला एवं बाल विकास, जिला कोषालय, खनिज विभाग, भू-अभिलेख और सामाजिक न्याय विभाग समेत कई अन्य दफ्तरों में एक साथ की गई।
जांच के दौरान कई कर्मचारियों ने फील्ड में होने या आसपास ही मौजूद होने जैसे बहाने बनाए, लेकिन अधिकारियों ने उनकी एक न सुनी। जब्त किए गए रजिस्टरों की जांच कर लेटलतीफ कर्मचारियों पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने दी थी शनिवार की छुट्टी खत्म करने की चेतावनी
गौरतलब है कि हाल ही में राज्य सरकार ने वर्ष 2026 के लिए सरकारी छुट्टियों की सूची जारी करते हुए हफ्ते में पांच दिन काम करने की व्यवस्था को बनाए रखा है।
लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि अगर अधिकारी और कर्मचारी समय पर दफ्तर नहीं पहुंचते हैं और कामकाज प्रभावित होता है, तो शनिवार की छुट्टी को खत्म करने पर भी विचार किया जा सकता है। इसी चेतावनी के बाद कलेक्टर ने अपने ही कार्यालय से औचक निरीक्षण की शुरुआत की है।
कलेक्टर शिवम वर्मा पहले ही सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक अनिवार्य रूप से कार्यालय में उपस्थित रहने के सख्त निर्देश दे चुके हैं। बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम होने के बावजूद हाजिरी रजिस्टर में भी हस्ताक्षर करने होते हैं। इस औचक कार्रवाई से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि काम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।