मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए अनुशासनात्मक और आपराधिक जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने यह फैसला टीआई इंद्रमणि पटेल द्वारा एक युवक के खिलाफ कथित तौर पर झूठा चालान पेश करने और अहम सबूत छिपाने के मामले में सुनाया है।
न्यायमूर्ति विवेक रूसिया की एकल पीठ ने न केवल टीआई पटेल के खिलाफ जांच का आदेश दिया, बल्कि याचिकाकर्ता विशाल सोनवणे के विरुद्ध दर्ज एफआईआर और संबंधित चालान को भी खारिज कर दिया। कोर्ट ने इंदौर के पुलिस महानिरीक्षक (IG) और पुलिस अधीक्षक (SP) को इस मामले की गहन जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला इंदौर के आदिम जाति कल्याण पुलिस थाने से जुड़ा है, जहां टीआई इंद्रमणि पटेल पदस्थ थे। विशाल सोनवणे नामक एक युवक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि टीआई पटेल ने उन्हें मारपीट और अन्य धाराओं में एक झूठे मामले में फंसाया है। पुलिस ने इस मामले में कोर्ट में चालान भी पेश कर दिया था, जिसे याचिकाकर्ता ने चुनौती दी थी।
एक वीडियो ने खोली पुलिस की पोल
इस केस में एक मोबाइल वीडियो सबसे महत्वपूर्ण सबूत साबित हुआ। याचिकाकर्ता विशाल सोनवणे ने अपने मोबाइल फोन से एक वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिसमें टीआई इंद्रमणि पटेल थाने के अंदर ही उन्हें धमकाते हुए नजर आ रहे थे। पुलिस ने अपनी केस डायरी और चालान में इस वीडियो का कोई जिक्र नहीं किया।
पुलिस ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने याचिकाकर्ता का मोबाइल जब्त कर लिया था, लेकिन वीडियो को जानबूझकर छिपा लिया गया। जब यह वीडियो हाईकोर्ट के सामने पेश किया गया, तो पुलिस की मंशा और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
कोर्ट की तीखी टिप्पणी
न्यायमूर्ति विवेक रूसिया ने अपने आदेश में पुलिस के इस रवैये पर गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा, “यह स्पष्ट है कि जांच अधिकारी (टीआई पटेल) ने जानबूझकर इस महत्वपूर्ण सबूत को केस डायरी से बाहर रखा, जो न्याय की प्रक्रिया को गुमराह करने का एक प्रयास है।”
अदालत ने माना कि यह एक निर्दोष व्यक्ति को झूठे मामले में फंसाने की कोशिश थी। कोर्ट के अनुसार, एक पुलिस अधिकारी का ऐसा आचरण बेहद गंभीर है और इसे किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
विवादों से रहा है पुराना नाता
यह पहला मौका नहीं है जब टीआई इंद्रमणि पटेल विवादों में घिरे हैं। इससे पहले भी वह इंदौर में ‘पट्टा कांड’ को लेकर सुर्खियों में आए थे। उस समय उनका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह एक युवक को पुलिस स्टेशन में बेल्ट (पट्टे) से बेरहमी से पीटते हुए दिखाई दिए थे। इस घटना के बाद काफी हंगामा हुआ था और वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें लाइन अटैच कर दिया था।
हाईकोर्ट का अंतिम आदेश
सभी तथ्यों और सबूतों की समीक्षा के बाद, हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता विशाल सोनवणे के खिलाफ पेश किए गए चालान और एफआईआर को रद्द कर दिया। इसके साथ ही, कोर्ट ने इंदौर के आईजी और एसपी को निर्देश दिया है कि वे टीआई इंद्रमणि पटेल के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक और आपराधिक जांच शुरू करें। कोर्ट ने अधिकारियों से इस जांच की रिपोर्ट भी तलब की है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि दोषी अधिकारी पर उचित कार्रवाई हो।