इंदौर हाईकोर्ट सख्त: भागीरथपुरा में दूषित पानी से 30वीं मौत, ICU में अब भी 3 मरीज

Indore News : इंदौर में दूषित पानी के कहर से मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। बुधवार को एक और मौत के साथ ही इस त्रासदी में जान गंवाने वालों का आंकड़ा 30 तक पहुंच गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इसे ‘गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति’ करार देते हुए एक स्वतंत्र जांच आयोग का गठन कर दिया है।
बुधवार को भागीरथपुरा निवासी 62 वर्षीय लक्ष्मी रजक ने दम तोड़ दिया। परिजनों के अनुसार, उन्हें दो दिन पहले उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी किडनी खराब होने की भी जानकारी मिली।
इससे ठीक एक दिन पहले मंगलवार को खूबचंद नामक व्यक्ति की भी इसी वजह से मौत हो गई थी, जिसके बाद गुस्साए परिजनों ने सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन किया था।
फिलहाल, अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या घटकर 6 रह गई है, लेकिन इनमें से 3 की हालत गंभीर है और वे ICU में हैं, जबकि एक मरीज वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रहा है।
हाईकोर्ट ने बनाई जांच कमेटी
इस मामले पर मंगलवार को हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में करीब ढाई घंटे तक चली सुनवाई में अदालत ने बेहद सख्त रुख दिखाया। सरकार और नगर निगम की रिपोर्ट पर असंतोष जताते हुए कोर्ट ने कहा कि जमीनी स्तर पर निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं हुआ है।

“स्वच्छ पेयजल का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है। यह मामला गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति से जुड़ा है।” — इंदौर हाईकोर्ट बेंच अदालत ने रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया है।

यह आयोग जल प्रदूषण के असल कारणों, मौतों के सही आंकड़ों, बीमारियों की प्रकृति, चिकित्सा व्यवस्था की स्थिति, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही और पीड़ितों के लिए मुआवजे जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।

मौतों के आंकड़ों पर सरकार और याचिकाकर्ता आमने-सामने
सुनवाई के दौरान मौतों के आंकड़ों को लेकर भी बड़ा विरोधाभास सामने आया। मुख्य सचिव अनुराग जैन की मौजूदगी में पेश की गई सरकारी रिपोर्ट में कुल 23 मौतों का जिक्र था।
इसमें से केवल 16 मौतें ही दूषित पानी से होने की बात मानी गई, जबकि 4 को संदिग्ध और 3 को अन्य कारणों से हुई मौत बताया गया। वहीं, याचिकाकर्ताओं ने यह संख्या लगभग 30 बताई, जो अब हकीकत साबित हो रही है।
कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि पानी की गुणवत्ता की दैनिक जांच और प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य शिविर लगाने का काम जारी रखा जाए। आयोग को चार सप्ताह के भीतर अपनी अंतरिम रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 5 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।