इंदौर में हुकमचंद मिल की जमीन के पंजीयन से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस पंजीयन में करीब 26 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी चोरी का आरोप है। यह मामला सामने आने के बाद संबंधित विभागों की प्रक्रिया और दस्तावेजी मूल्यांकन पर सवाल उठे हैं।
जमीन पंजीयन में स्टांप ड्यूटी सरकार के लिए महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत होती है। किसी भी संपत्ति के सौदे में तय नियमों के मुताबिक मूल्यांकन और ड्यूटी निर्धारण किया जाता है। ऐसे में हुकमचंद मिल जैसी बड़ी जमीन के पंजीयन में इतनी बड़ी राशि की कथित कमी को गंभीर वित्तीय अनियमितता के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या है मुख्य आरोप
मामले का केंद्रीय बिंदु यह है कि पंजीयन के दौरान देय स्टांप ड्यूटी और वास्तविक भुगतान के बीच बड़ा अंतर बताया जा रहा है। इसी अंतर को करीब 26 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान माना जा रहा है। अभी तक उपलब्ध तथ्य इसी कथित स्टांप ड्यूटी चोरी के दायरे में केंद्रित हैं।
हुकमचंद मिल की जमीन लंबे समय से इंदौर के प्रमुख शहरी भूखंडों में गिनी जाती रही है। इसलिए इस जमीन के किसी भी लेनदेन या पंजीयन का असर केवल संबंधित पक्षों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि नगर नियोजन, राजस्व और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ जाता है।
पंजीयन प्रक्रिया पर उठे सवाल
ऐसे मामलों में सामान्य रूप से संपत्ति का बाजार मूल्य, गाइडलाइन मूल्य, दस्तावेजों की प्रकृति और पंजीयन श्रेणी की जांच की जाती है। यदि मूल्यांकन कम दर्शाया गया हो या लागू मदों में त्रुटि हो, तो स्टांप ड्यूटी में बड़ी कमी आ सकती है। मौजूदा विवाद ने इन्हीं चरणों की पारदर्शिता पर ध्यान खींचा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े भू-सौदों में मूल्यांकन और अनुमोदन की बहुस्तरीय व्यवस्था का उद्देश्य राजस्व नुकसान रोकना होता है। ऐसे में अगर कथित तौर पर 26 करोड़ रुपये की ड्यूटी बची है, तो जांच का दायरा दस्तावेज तैयार होने से लेकर अंतिम पंजीयन तक के हर चरण तक जा सकता है।
आगे की कार्रवाई क्यों अहम
इस तरह के मामलों में दो स्तरों पर कार्रवाई महत्वपूर्ण होती है। पहला, देय राजस्व की वसूली और दंडात्मक प्रावधानों की समीक्षा। दूसरा, भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए प्रक्रिया में सुधार और जवाबदेही तय करना।
इंदौर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में जमीन से जुड़े बड़े लेनदेन लगातार बढ़ रहे हैं। इसलिए स्टांप ड्यूटी निर्धारण, दस्तावेज सत्यापन और डिजिटल रिकॉर्ड के बीच बेहतर समन्वय जरूरी माना जा रहा है। इससे न केवल राजस्व संरक्षण होता है, बल्कि संपत्ति बाजार में भरोसा भी बना रहता है।
फिलहाल इस मामले का केंद्र बिंदु हुकमचंद मिल जमीन का पंजीयन और 26 करोड़ रुपये की कथित स्टांप ड्यूटी चोरी है। आगे की आधिकारिक जांच और विभागीय निष्कर्ष यह तय करेंगे कि राजस्व हानि का वास्तविक दायरा क्या है और जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।