खजराना गणेश मंदिर के गर्भगृह की चांदी जड़ी दीवारों का निखर रहा रूप, सौंदर्य संवर्धन कार्य तेज

इंदौर के खजराना गणेश मंदिर में इन दिनों गर्भगृह के सौंदर्यीकरण का काम चल रहा है। गर्भगृह की चांदी जड़ी दीवारों की चमक बढ़ाने के लिए लगातार सफाई कराई जा रही है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार यह काम कई दिनों से जारी है। इसके लिए बाहर के शहरों से भी श्रमिक बुलाए गए हैं। गर्भगृह के भीतर रोजाना श्रमिक दीवारों की सतह पर जमा कालापन हटाने में जुटे हैं।

मंदिर प्रशासन ने केवल सफाई तक काम सीमित नहीं रखा है। गर्भगृह में लगी पुरानी प्लाईवुड को भी बदला जा रहा है। इसके साथ सिंहासन पर लगी पुरानी चांदी भी हटाकर नई चांदी लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रबंध समिति का कहना है कि गर्भगृह और सिंहासन दोनों हिस्सों को एक साथ व्यवस्थित किया जा रहा है, ताकि मुख्य पूजा स्थल की संरचना और धातु सजावट एक समान बनी रहे।

दान से बनी चांदी की दीवारें, समय के साथ पड़ीं बदरंग

मंदिर के पुजारी पंडित धर्मेंद्र भट्ट ने बताया कि पहले चांदी दान अभियान चलाया गया था। उनके अनुसार उस समय तत्कालीन कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने भक्तों से चांदी दान की अपील की थी। अपील के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने चांदी के गहने और अन्य सामग्री दान की। इसी दान से गर्भगृह और मुख्य द्वार पर नक्काशीदार चांदी की दीवारें तैयार कराई गई थीं।

“तत्कालीन कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने भक्तों से चांदी दान की अपील की थी। इसके बाद श्रद्धालुओं ने चांदी के गहनों और सामग्रियों का दान किया, जिससे गर्भगृह और मुख्य द्वार पर चांदी की नक्काशीदार दीवार बनाई गई थी।” — पंडित धर्मेंद्र भट्ट

समय बीतने के साथ इन चांदी की सतहों पर कालापन आ गया। मंदिर के भीतर मौजूद नमी, धूप-दीप और लगातार उपयोग से दीवारों की चमक कम होती गई। इसके बाद मंदिर प्रबंध समिति ने दीवारों की सफाई का फैसला लिया। फिलहाल गर्भगृह में पांच श्रमिक लगातार इस काम में लगे हैं। मंदिर आने वाले श्रद्धालु भी इन श्रमिकों को नियमित रूप से काम करते देख रहे हैं।

गणपति प्रतिमा के लिए नया स्वर्ण मुकुट अभी नहीं बनेगा

मंदिर में गणपति बप्पा की प्रतिमा के लिए नया स्वर्ण मुकुट बनाने का प्रस्ताव भी लिया गया था। हालांकि यह योजना फिलहाल रोक दी गई है। मंदिर से जुड़ी जानकारी के मुताबिक नए मुकुट के लिए आठ से दस किलो सोने की जरूरत है। उपलब्ध सोने की मात्रा अभी इस स्तर तक नहीं पहुंची है, इसलिए निर्माण प्रक्रिया शुरू नहीं की गई।

मंदिर प्रबंधन के पास भक्तों द्वारा दान किया गया कुछ सोना मौजूद है। यह सोना गौशाला में जमा बताया गया है। लेकिन मुकुट निर्माण के लिए जितनी कुल मात्रा चाहिए, उतना सोना अभी उपलब्ध नहीं है। इसी वजह से मुकुट तैयार कराने का निर्णय आगे के लिए टाल दिया गया है। जब पर्याप्त मात्रा जुटेगी, तब इस प्रस्ताव पर फिर से प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

प्रबंध समिति फिलहाल मौजूदा संरचनात्मक और धातु संरक्षण संबंधी काम पर ध्यान दे रही है। गर्भगृह की चांदी साफ कर चमक बहाल करने का काम प्राथमिकता में रखा गया है। सिंहासन पर पुरानी चांदी बदलने और अंदरूनी हिस्से की प्लाईवुड बदलने को भी इसी चरण में रखा गया है। मंदिर प्रशासन का उद्देश्य पहले वर्तमान व्यवस्था को व्यवस्थित करना है।

भक्त सदन में शुरू हुआ आवास, पार्किंग व्यवस्था भी सुधर रही

खजराना मंदिर परिसर में बना भक्त सदन अब उपयोग में आ चुका है। मंदिर प्रशासन के अनुसार यहां श्रद्धालु आना शुरू हो गए हैं। इस सदन में 20 से ज्यादा कमरे बनाए गए हैं। इन कमरों को नाम मात्र शुल्क पर किराए से दिया जा रहा है। बाहर से आने वाले भक्तों के लिए यह सुविधा आवास की तत्काल जरूरत पूरी कर रही है।

मंदिर परिसर के पार्किंग क्षेत्र को भी व्यवस्थित किया जा रहा है। प्रबंधन का लक्ष्य दर्शन व्यवस्था के साथ यातायात दबाव को संतुलित करना है। आवास, पार्किंग और गर्भगृह संरक्षण के काम साथ चलने से परिसर की समग्र व्यवस्था पर असर पड़ेगा। फिलहाल मंदिर में मुख्य फोकस गर्भगृह की चांदी की सफाई, आंतरिक बदलाव और लंबित योजनाओं की चरणबद्ध तैयारी पर बना हुआ है।