स्वतंत्र समय, इंदौर
बिलावली क्षेत्र में कॉलोनियों के अवैध निर्माण के मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद भी आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। नगर निगम ने 20 दिन पहले पांच भूमाफिया ( land mafia ) के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी, लेकिन इसके बाद से यह मामला ठंडे बस्ते में है। क्योंकि अब तक पुलिस इन भूमाफिया को गिरफ्तार नहीं कर पाई है, और नगर निगम भी पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाकर चुप्पी साधे बैठा है।
land mafia को दिया जा रहा है संरक्षण
पुलिस और निगम की कार्यप्रणाली से साफ जाहिर होता है कि भूमाफिया ( land mafia ) को संरक्षण दिया जा रहा है। यह मामला बेहद गंभीर है। क्योंकि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो यह नजीर बन सकता है, जिससे अन्य क्षेत्रों में भी इस तरह के अवैध निर्माणों को बढ़ावा मिल सकता है। भंवरकुआ थाने पर नगर निगम ने 23 नवंबर को यह शिकायत दर्ज कराई थी। सहायक यंत्री सत्येंद्र सिंह के आवेदन पर पांच आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया। आरोप है कि दशरथ राठौर, लीलाधर चौहान, गुलाब सिंह पटेल, आरती शादीजा और जितेंद्र शादीजा ने बिलावली क्षेत्र की भूमि सर्वे नंबर 81/2, 86/1, 87/1, 88/1/1, 88/2, 88/1/2, 91/2 और 85/1/2 पर अवैध कॉलोनियों का निर्माण किया। प्रकरण शिकायतकर्ता, हरपाल सिंह अरोरा, निवासी पलसीकर कालोनी की शिकायत पर दर्ज करवाई गई थी। दरअसल आरोपियों ने नगर निगम से विकास की अनुमति लिए बिना ही इन कॉलोनियों का निर्माण किया और भूखंड बेच दिए। यहां तक कि कुछ भूखंडधारकों ने भवन निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया।
नगर निगम और पुलिस की लापरवाही से बेखौफ हैं भूमाफिया
नगर निगम के भवन अनुजा शाखा ने निर्माण हटाने के लिए नोटिस जारी किए, लेकिन न तो निर्माण हटाया गया और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया गया। मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1956 की धारा 292 (ग) के तहत बिना अनुमति कॉलोनी का विकास अवैध है। नगर निगम के जांच प्रतिवेदन में इन आरोपों की पुष्टि हुई, जिसके बाद पुलिस के पास मामला पहुंचा। एफआईआर में स्पष्ट रूप से नामजद पांच आरोपियों के बावजूद पुलिस अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं कर पाई है। नगर निगम ने भी शिकायत दर्ज कराने के बाद इस मामले को आगे बढ़ाने की कोशिश नहीं की। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नगर निगम और पुलिस की लापरवाही के कारण भूमाफिया बेखौफ हैं। इसका खामियाजा क्षेत्र के विकास और पर्यावरण को भुगतना पड़ रहा है। जब तक भूमाफिया गिरफ्तार नहीं होते और इन कॉलोनियों को पूरी तरह से ध्वस्त नहीं किया जाता, तब तक यह समस्या बनी रहेगी। स्थानीय लोगों ने इस मामले में जल्द कार्रवाई की मांग की है। नगर निगम और पुलिस के बीच बेहतर तालमेल और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि बिलावली क्षेत्र को इन अवैध कॉलोनियों से मुक्त किया जा सके।
न कोई अनुमति, न जल स्त्रोत से दूरी के नियम का पालन
हरपाल सिंह ने शिकायत में बताया था कि झोन 13 के वार्ड 77 में आने वाले बिलावली क्षेत्र में जिस जमीन पर कॉलोनी विकसित की जा रही है, उसकी न तो कोई टीएनसीपी (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) से नक्शा पास करवाया गया और न ही डायवर्शन कराया गया है। इसके अलावा, कॉलोनी के लिए जरूरी सुविधाएं जैसे कि सडक़, बिजली, जल आपूर्ति, और ड्रेनेज सिस्टम का निर्माण भी नहीं किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, यह जमीन नाले के पास स्थित है, और जल स्त्रोत से दूरी का जो नियम है, उसका उल्लंघन किया गया है। इसके अलावा, बिजली कंपनी से बिना एन.ओ.सी. लिए कॉलोनी में बिजली का उपभोग किया जा रहा है, अवैध बोरिंग के जरिए पानी की आपूर्ति की जा रही है, जो शासन के नियमों के खिलाफ है। यहां प्लॉटों की रजिस्ट्री की जा रही है और लोन भी दिए जा रहे हैं, जो शासन के राजस्व को नुकसान पहुंचा रहे हैं। म.प्र. भू विकास अधिनियम के अनुसार, बिना उचित अनुमति के कॉलोनी का निर्माण करना अपराध है, और दोषियों पर पेनल्टी भी लग सकती है।
क्या कहती है एफआईआर?
एफआईआर में नगर निगम ने आरोपियों द्वारा बेचे गए भूखंडों के विक्रय पत्र, मौके की तस्वीरें और जांच रिपोर्ट को भी संलग्न किया है। यह स्पष्ट है कि आरोपियों ने नियमों का उल्लंघन किया और नगर निगम की अनुमति के बिना कॉलोनियों का निर्माण किया। अवैध निर्माण के कारण क्षेत्रीय विकास पर बुरा असर पड़ा है। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि भविष्य में लोगों के लिए बड़ी समस्याएं खड़ी कर सकता है।
आरोपियों के नाम और पते…
दशरथ राठौर, निवासी लिम्बोदी राम मंदिर के पास, खंडवा रोड।
लीलाधर चौहान, निवासी चितावत कांकड़।
गुलाब सिंह पटेल, निवासी गणेश नगर, बिलावली।
आरती शादीजा, निवासी पलसीकर कॉलोनी।
जितेंद्र शादीजा, निवासी पलसीकर कॉलोनी।
निगम अधिकारी बोले-
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने अपनी ओर से सभी आवश्यक दस्तावेज और सबूत पुलिस को सौंप दिए हैं। अब यह पुलिस की जिम्मेदारी है कि वह जल्द से जल्द कार्रवाई करे। वहीं भंवरकुआ पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।