बड़ा गणपति के पास टूटेंगे 16 मकान, मेट्रो कंपनी देगी प्रभावितों को मुआवजा

इंदौर में मेट्रो ट्रेन परियोजना के विस्तार में आ रही बाधाओं को दूर करने का काम तेज हो गया है। शहर के व्यस्ततम इलाकों में से एक बड़ा गणपति चौराहे के पास मेट्रो लाइन के एलाइनमेंट और निर्माण कार्य के लिए 16 मकानों को तोड़ा जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रोजेक्ट की गति बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई आवश्यक है।

मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण के दौरान अक्सर घनी आबादी वाले क्षेत्रों में जमीन अधिग्रहण की चुनौती सामने आती है। बड़ा गणपति क्षेत्र में भी मेट्रो रूट के लिए पर्याप्त जगह की कमी महसूस की जा रही थी। हाल ही में किए गए सर्वे के बाद यह तय किया गया है कि इन 16 बाधक निर्माणों को हटाना ही एकमात्र विकल्प है।

मेट्रो कंपनी देगी मुआवजा

इस पूरी प्रक्रिया में सबसे अहम पहलू प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे का है। सामान्यतः शहरी विकास कार्यों में अतिक्रमण हटाने या बाधक निर्माण तोड़ने पर नगर निगम द्वारा कार्रवाई की जाती है, लेकिन यहाँ स्थिति अलग है। चूँकि यह निर्माण कार्य मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए किया जा रहा है, इसलिए मुआवजे की पूरी जिम्मेदारी मेट्रो प्रबंधन ने ली है।

अधिकारियों के अनुसार, मेट्रो कंपनी प्रभावित मकान मालिकों को नियमानुसार मुआवजा राशि प्रदान करेगी। इसके लिए मूल्यांकन की प्रक्रिया अपनाई जा रही है ताकि किसी भी पक्ष को नुकसान न हो। नगर निगम की भूमिका इसमें सहयोगी की रहेगी, जो डिमार्केशन (सीमांकन) और निर्माण हटाने में मदद करेगा।

सर्वे और चिह्नांकन का काम पूरा

नगर निगम और मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की संयुक्त टीम ने पिछले दिनों इस क्षेत्र का दौरा किया था। तकनीकी टीम ने एलाइनमेंट का निरीक्षण करने के बाद उन 16 मकानों की सूची तैयार की है जो सीधे तौर पर मेट्रो लाइन या स्टेशन क्षेत्र के दायरे में आ रहे हैं।

इन मकानों के टूटने से सड़क की चौड़ाई बढ़ेगी और मेट्रो के पिलर व अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए आवश्यक जगह मिल सकेगी। बड़ा गणपति से लेकर राजमोहल्ला और आगे के रूट पर मेट्रो का काम युद्धस्तर पर जारी है। प्रशासन का प्रयास है कि जमीनी विवादों को जल्द से जल्द सुलझाकर निर्माण कार्य को समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए।

निवासियों से चर्चा और आगे की राह

प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि कार्रवाई से पहले प्रभावितों को नोटिस जारी किए जाएंगे और उन्हें अपना पक्ष रखने या सामान हटाने का समय दिया जाएगा। मुआवजे की राशि तय करने के लिए पीडब्ल्यूडी (लोक निर्माण विभाग) की गाइडलाइन या कलेक्टर गाइडलाइन का सहारा लिया जा सकता है।

इंदौर मेट्रो का यह हिस्सा काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पुराने शहर को कनेक्टिविटी प्रदान करता है। अधिकारियों का मानना है कि इन बाधक निर्माणों के हटते ही इस रूट पर पिलर खड़े करने और गर्डर लॉन्चिंग के काम में तेजी आएगी।