इंदौर: विकास कार्यों की अनदेखी से सांसद-विधायक नाराज: अफसरों की CM से शिकायत करेंगे दिग्गज नेता

Indore News: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में राजनीति और ब्यूरोक्रेसी (नौकरशाही) के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। शहर के जनप्रतिनिधियों—जिनमें सांसद, विधायक और महापौर शामिल हैं—ने अब सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने अधिकारियों की ‘मनमानी’ का कच्चा चिट्ठा खोलने की तैयारी कर ली है। रविवार को मुख्यमंत्री के इंदौर दौरे के दौरान यह मुद्दा गरमाने वाला है।
भाजपा कार्यालय में बनी रणनीति: सीएम से होगी सीधी बात
शुक्रवार देर शाम इंदौर स्थित भाजपा कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक वैसे तो रविवार को दशहरा मैदान पर होने वाले ‘नर्मदा के चौथे चरण’ के कार्यक्रम की तैयारियों के लिए बुलाई गई थी, लेकिन चर्चा का मुख्य केंद्र अधिकारियों का अड़ियल रवैया रहा। सूत्रों के अनुसार, बैठक में सर्वसम्मति से तय हुआ कि जो अधिकारी जनप्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, उनकी शिकायत सीधे मुख्यमंत्री से की जाएगी।
“सुझावों को हवा में उड़ा देते हैं अफसर”
बैठक में मौजूद भाजपा नेताओं ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि अधिकारी मुख्यमंत्री का कार्यक्रम तय करने से पहले स्थानीय जनप्रतिनिधियों से चर्चा करना भी जरूरी नहीं समझते। सांसदों और विधायकों का आरोप है कि विकास कार्यों को लेकर दिए गए उनके सुझावों को अधिकारी अनसुना कर देते हैं, जिससे जनता के बीच सरकार की छवि प्रभावित हो रही है।
विधायकों की प्रमुख शिकायतें:
  • महेंद्र हार्डिया (विधायक, इंदौर-5): “अधिकारी बिल्कुल नहीं सुन रहे हैं। यहां तक कि विधायक निधि से स्वीकृत जनहित के काम भी अटके हुए हैं।”
  • मधु वर्मा (विधायक, राऊ): “अधिकारियों के रवैये से विकास कार्य ठप पड़े हैं। नगर निगम में अगर किसी जायज काम के लिए फोन किया जाए, तो भी सुनवाई नहीं होती।”
  • गोलू शुक्ला (विधायक, इंदौर-3): “प्रशासनिक स्तर पर कोई समन्वय नहीं है, जनहित के मुद्दों पर अफसर संवेदनहीन बने हुए हैं।”
अब हर महीने होगी ‘अग्निपरीक्षा’: समीक्षा बैठक का निर्णय
अधिकारियों पर नकेल कसने के लिए जनप्रतिनिधियों ने एक बड़ा निर्णय लिया है। अब हर महीने रेसीडेंसी कोठी में शहर विकास की समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी।
  • कौन होगा शामिल: इस बैठक में संभागायुक्त, कलेक्टर, निगम कमिश्नर और आईडीए (IDA) के अफसरों के साथ सांसद, सभी विधायक और महापौर अनिवार्य रूप से मौजूद रहेंगे।
  • एजेंडा: हर विभाग को नर्मदा परियोजना, सड़कों का निर्माण, ब्रिज, स्ट्रीट लाइट, ट्रैफिक और आवारा कुत्तों की समस्या जैसे गंभीर मुद्दों पर अपनी प्रगति रिपोर्ट पेश करनी होगी।
संगठन और सत्ता का सख्त रुख
बैठक में सांसद शंकर लालवानी और महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी इस बात पर जोर दिया कि यदि अधिकारियों का यही रवैया रहा, तो शहर का विकास प्रभावित होगा। नेताओं का मानना है कि अधिकारियों की इस कार्यप्रणाली से जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं और आम जनता में नाराजगी बढ़ रही है।
रविवार को जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव नर्मदा के चौथे चरण के कार्यक्रम के लिए मंच साझा करेंगे, तब इंदौर के ये दिग्गज नेता उन्हें बंद कमरे में या अलग से मिलकर पूरी स्थिति से अवगत कराएंगे। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री के दखल के बाद इंदौर की ब्यूरोक्रेसी की कार्यशैली में कितना बदलाव आता है।