Indore News : शहर में संपत्ति कर और राजस्व रिकॉर्ड की अव्यवस्था को खत्म करने के लिए इंदौर नगर निगम ने एक नई और सख्त कार्ययोजना लागू की है।
निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव ने ‘SIR’ (स्मार्ट, इंपैक्टफुल गवर्नेंस एंड रिजल्ट्स) मॉडल पेश करते हुए अधिकारियों को 30 नवंबर तक का अल्टीमेटम दिया है। इस तारीख के बाद आयुक्त स्वयं शहर में कहीं भी औचक निरीक्षण करेंगे और किसी भी तरह की अनियमितता पाए जाने पर कार्रवाई सीधे उनके स्तर से होगी।
यह कदम निगम के राजस्व रिकॉर्ड और संपत्तियों के वास्तविक उपयोग में लंबे समय से चले आ रहे अंतर को पाटने के लिए उठाया गया है। कई मामलों में, संपत्तियों को दस्तावेजों में रिहायशी दिखाया गया है, जबकि उनका उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए हो रहा है, जिससे निगम को बड़े राजस्व का नुकसान हो रहा है।
क्या है ‘SIR’ मॉडल?
निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव ने अपनी कार्यशैली को ‘SIR’ के रूप में परिभाषित किया है, जिसका अर्थ है—स्मार्ट, इंपैक्टफुल गवर्नेंस एंड रिजल्ट्स। इसका उद्देश्य है कि निगम का हर काम स्मार्ट तरीके से हो, उसका असर ज़मीन पर दिखे और परिणाम ठोस हों। यह मॉडल केवल एक नया नाम नहीं, बल्कि निगम की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और परिणाम-उन्मुख दृष्टिकोण लाने का एक स्पष्ट संकेत है।
पहले सुधार, अब सख्ती की तैयारी
इस नई नीति को दो चरणों में लागू किया जा रहा है। पहले चरण में, निगम ने आम जनता को अपनी संपत्ति से जुड़े दस्तावेज़ों को दुरुस्त करने का मौका दिया। इसके लिए पंद्रह दिनों का एक विशेष शिविर आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों ने हिस्सा लिया और अपने रिकॉर्ड सही कराए। इस पहल से राजस्व रिकॉर्ड को साफ करने में काफी मदद मिली।
अब अभियान का दूसरा और निर्णायक चरण शुरू हो गया है। आयुक्त ने सभी सहायक राजस्व अधिकारियों (ARO) और बिल कलेक्टरों को निर्देश दिया है कि वे 30 नवंबर तक अपने-अपने क्षेत्रों की हर संपत्ति का सर्वे पूरा करें। इस सर्वे में संपत्ति के वास्तविक उपयोग, निर्माण की अनुमति और अन्य सभी विवरणों का सटीक ब्यौरा दर्ज करना होगा।
आयुक्त ने स्पष्ट कर दिया है कि 30 नवंबर के बाद कोई रियायत नहीं दी जाएगी। यदि जांच के दौरान यह पाया जाता है कि रिहायशी अनुमति पर व्यावसायिक गतिविधि चल रही है, तो संबंधित संपत्ति मालिक और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। यह इंदौर की राजस्व प्रणाली में अनुशासन लाने की एक निर्णायक कोशिश मानी जा रही है, जिसमें किसी भी तरह के दबाव या हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी गई है।