मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर अब स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में एक नया मुकाम हासिल करने जा रही है। सेंट्रल इंडिया के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल महाराजा यशवंत राव (एमवाय) हॉस्पिटल का अब पूरी तरह कायाकल्प होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को अस्पताल के नए भवन का भूमिपूजन कर इस महत्वाकांक्षी परियोजना की औपचारिक शुरुआत की। करीब 773 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह नया अस्पताल न केवल इंदौर, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगा।
प्रदेश का सबसे बड़ा और अत्याधुनिक अस्पताल बनेगा एमवाय
इस मेगा प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद एमवाय अस्पताल प्रदेश का सबसे बड़ा और आधुनिक सरकारी अस्पताल बन जाएगा। नए भवन में अस्पताल की क्षमता बढ़ाकर 1450 बिस्तरों की की जा रही है। सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि यहां बोन मैरो ट्रांसप्लांट और किडनी ट्रांसप्लांट जैसी जटिल और अत्यंत महंगी चिकित्सा सेवाएं मरीजों को पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को महानगरों और निजी अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
70 साल पुरानी विरासत को मिलेगा नया जीवन
1952 में महाराजा यशवंत राव होलकर द्वारा स्थापित एमवाय अस्पताल पिछले सात दशकों से मध्य प्रदेश और आसपास के राज्यों के लाखों मरीजों के लिए जीवनरेखा बना हुआ है। समय के साथ अस्पताल की सात मंजिला पुरानी इमारत अपनी उपयोगी उम्र पूरी कर चुकी है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने इसे पूरी तरह नए सिरे से विकसित करने का निर्णय लिया है, ताकि आधुनिक चिकित्सा की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा किया जा सके।
मुख्यमंत्री का विज़न: इंदौर की पहचान को मिलेगा और विस्तार
भूमिपूजन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जिस तरह इंदौर शहर प्रदेश का गौरव है, उसी तरह एमवाय अस्पताल की भी एक अलग पहचान रही है। नए भवन के निर्माण के बाद यह अस्पताल न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि सीमावर्ती राज्यों के मरीजों को भी विश्वस्तरीय इलाज उपलब्ध कराएगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि आम नागरिक को बड़े शहरों जैसी स्वास्थ्य सुविधाएं सरकारी अस्पतालों में ही मिलें।
अत्याधुनिक ढांचे के साथ तैयार होगा नया अस्पताल
मध्य प्रदेश भवन विकास निगम द्वारा विकसित किए जा रहे इस अस्पताल का डिजाइन और सेटअप पूरी तरह आधुनिक होगा। 1450 बिस्तरों वाले इस अस्पताल भवन के निर्माण पर ही करीब 528 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा मेडिकल उपकरण, सुविधाएं और अन्य व्यवस्थाओं के लिए अलग से बजट तय किया गया है, ताकि इलाज में किसी तरह की कमी न रह जाए।
विभागवार बढ़ेगी इलाज की क्षमता
नए एमवाय अस्पताल में हर विभाग के लिए अलग-अलग और पर्याप्त संख्या में बिस्तरों की व्यवस्था की जा रही है। मेडिसिन और सर्जरी विभाग में 330-330 बेड होंगे, जबकि ऑर्थोपेडिक्स में 180 और इमरजेंसी मेडिसिन वार्ड में भी 180 बेड की सुविधा मिलेगी। मातृ एवं शिशु वार्ड और शिशु रोग विभाग में 100-100 बेड रखे जाएंगे। इसके अलावा नेत्र विभाग के लिए 80, शिशु रोग सर्जरी और न्यूरो सर्जरी के लिए 60-60 बेड, नाक-कान-गला विभाग में 30 और दंत व त्वचा रोग विभाग में 20-20 बेड की व्यवस्था की गई है।
बुनियादी सुविधाओं पर भी बड़ा निवेश
सरकार ने सिर्फ अस्पताल भवन ही नहीं, बल्कि पूरे परिसर के समग्र विकास पर भी खास ध्यान दिया है। नर्सिंग स्टाफ के लिए 550 बिस्तरों वाला आधुनिक नर्सिंग हॉस्टल बनाया जाएगा, जिस पर 21.37 करोड़ रुपये खर्च होंगे। शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए 250 सीटों वाला मिनी ऑडिटोरियम बनाया जाएगा, जिसकी लागत 1.60 करोड़ रुपये होगी।
मरीजों और परिजनों की सुविधा भी प्राथमिकता
अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए 31.50 करोड़ रुपये की लागत से सार्वजनिक पार्किंग का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही विद्युतीकरण, बाउंड्रीवॉल, सोलर पैनल जैसी व्यवस्थाओं के लिए 25.53 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और वाटर सप्लाई सिस्टम के लिए भी करीब 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, ताकि अस्पताल पूरी तरह आत्मनिर्भर और पर्यावरण के अनुकूल बन सके।
गुणवत्ता से समझौता नहीं करने के सख्त निर्देश
भूमिपूजन कार्यक्रम में नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निर्माण एजेंसी के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता न किया जाए। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल एक इमारत नहीं, बल्कि लाखों लोगों के जीवन से जुड़ा भरोसा है, जिसे पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ पूरा किया जाना चाहिए।