इंदौर: भागीरथपुरा में जहरीले पानी का कहर, 8 लोगों की मौत के बाद हाईकोर्ट में लगी 2 जनहित याचिकाएं

Indore News : मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के सेवन से मचे हाहाकार ने अब कानूनी रूप ले लिया है। इस गंभीर लापरवाही के कारण 8 लोगों की जान जा चुकी है और 100 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में आज दो जनहित याचिकाएं (PIL) दायर की गई हैं, जिन पर आज ही सुनवाई हुई है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने 2 जनवरी तक स्टेटस रिपोर्ट तलब की है।

प्रशासन की लापरवाही और मौत का आंकड़ा

भागीरथपुरा के वार्ड क्रमांक 11 में पिछले कुछ दिनों से नलों में गंदा पानी आ रहा था। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों को इसकी बार-बार शिकायत की, लेकिन उनकी चेतावनी को अनसुना कर दिया गया। नतीजा यह हुआ कि दूषित पानी पीने से मौत का सिलसिला शुरू हो गया और देखते ही देखते 100 से ज्यादा लोग बीमार पड़ गए। वर्तमान में कई मरीजों की हालत चिंताजनक बनी हुई है।

बुनियादी ढांचे में बड़ी खामी

जांच में सामने आया है कि 1997 में बनी पानी की टंकी के पास ही साल 2003 में नर्मदा पाइपलाइन के ठीक ऊपर एक शौचालय बना दिया गया था। आशंका जताई जा रही है कि इसी वजह से सीवरेज का पानी पेयजल लाइन में मिल गया। हालाकि, रामकी कंपनी के कर्मचारियों ने सितंबर और दिसंबर में टंकी की सफाई की थी, लेकिन संक्रमण पर काबू नहीं पाया जा सका।

अब तक की कार्रवाई

प्रशासन ने प्रारंभिक जांच के आधार पर तीन अधिकारियों पर गाज गिराई है:

  • जेडओ (ZO), सहायक यंत्री और उपयंत्री के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।

  • इलाके में वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था शुरू की गई है।

हाईकोर्ट में होने वाली आज की सुनवाई पर पूरे शहर की नजरें टिकी थी, जहां पीड़ित पक्ष ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजे की मांग की है। याचिका में इसमें दोषी अफसर के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की गुहार की गई है। एक जनहित याचिका एडवोकेट रितेश इनानी ने दायर की है जबकि दूसरी पूर्व पार्षद महेश गर्ग एवं प्रमोद द्विवेदी द्वारा एडवोकेट मनीष यादव के माध्यम से लगी है

चीफ जस्टिस से याचिका पर अर्जेंट सुनवाई की गुहार की गई थी। याचिका में कहा गया है कि यह आम आदमी की जान के साथ बरती गई घोर लापरवाही है जिसके दोषियों को दंडित किया जाना बहुत जरुरी है। सुनवाई के दौरान सरकार से पूरे मामले की 2 जनवरी तक स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा है। एडवोकेट इनानी एवं यादव ने बताया कि कोर्ट ने पीड़ितों का निशुल्क इलाज करने के निर्देश भी दिए हैं।